जिला अस्पताल में अब तक एक डॉक्टर, तीन नर्स और दो सफाईकर्मी मिलाकर स्टाफ के कुल 6 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिला अस्पताल में न तो मरीजों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जा रहा है और न ही स्टाफ की सुरक्षा का। लापरवाही का आलम यह है कि यहां एक ही वार्ड में निर्धारित पलंग के अलावा गलियारे से लेकर फर्श तक मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। जिनके साथ बड़ी संख्या में उनके परिजन भी अस्पताल में ही मौजूद रहते हैं। न तो इन्हें प्रबंधन की कोई रोक-टोक है और न ही सुरक्षाकर्मियों की।
जब दैनिक भास्कर टीम ने अस्पताल का जायजा लिया तो नर्सिंग स्टाफ बिना किट और ग्लव्ज के मरीजों का इलाज करते हुए दिखाई दिया। पड़ताल के दौरान सामने आया कि वार्ड क्रमांक 4 में हड्डी के ऑपरेशन वाले मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें गलियारे में भर्ती किया जा रहा है। वहीं जब गलियारा भी भर गया तो मरीजों को फर्श पर भर्ती करने की नौबत आ गई है। इलाज की व्यवस्था जानने के लिए सागर निवासी एक मरीज के परिजन राम सिंह अहिरवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके मरीज का पिछले 15 दिन से ऑपरेशन टाला जा रहा है हर बार उन्हें नई तारीख दे दी जाती है, अब डॉक्टर शुक्रवार को ऑपरेशन करने का कह रहे हैं। वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों का भी है।
इसके अलावा वार्ड नंबर 5 जहां पदस्थ नर्स 2 दिन पहले पॉजिटिव निकली थी, उस वार्ड को भी एहतियात के तौर पर न तो बंद किया गया और न ही पॉजिटिव निकलने के बाद वार्ड सैनिटाइज किया गया।जिला अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों के साथ संपर्क में रहे स्टाफ को क्वारंेटाइन करने के निर्देश हैं। लेकिन प्रबंधन इनमें से भी कई लोगों को अपनी व्यवस्था के हिसाब से क्वारेंटाइन कर रहा है। यानी पॉजिटिव के संपर्क में रहे स्टाफ से अब भी काम लिया जा रहा है। इससे अन्य स्टाफ और मरीजों में संक्रमण फैल सकता है। वहीं जो किराए के मकान में रहते हैं, उन्हें संस्थागत क्वारेेंटाइन करने के निर्देश हैं।
डॉ. वीके तोमर, सिविल सर्जन जिला अस्पताल से सीधी बात
उपकरण दिए हैं, इस्तेमाल न करें तो हमारी क्या गलती
सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान क्यों नहीं रखा जा रहा?
वार्डों में बोलने के बाद भी लोग नहीं मानते। लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा।
स्टाफ बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहा है, उन्हें ग्लब्स क्यों नहीं दिए गए?
ग्लव्स दिए गए हैं, कोई कमी नहीं अब वे इस्तेमाल न करें तो हमारी क्या गलती।
किराए के मकानों में रहने वाले स्टाफ को संस्थागत को क्वारेंटाइन करने के निर्देश हैं, लेकिन उन्हें होम क्वारेंटाइन क्यों किया जा रहा है?
मैंने संस्थागत क्वारेंटाइन करने के लिए सभी को बुलाया था, लेकिन कोई आया ही नहीं। हालांकि होम क्वारेंटाइन करने के भी निर्देश हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/6-positives-including-a-doctor-and-nursing-staff-yet-negligence-peaks-127372830.html
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