संवाददाता जबलपुर| शराब दुकानों को लेकर सरकार और ठेकेदारों के बीच चल रही खींचतान के मामले पर हाईकोर्ट में अब 23 जून को सुनवाई होगी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ को बताया गया कि ठेकेदारों ने 63 फीसदी दुकानें सरेण्डर कर दी हैं। यानि 10 हजार 700 करोड़ के ठेकों में से 6 हजार 7 सौ करोड़ वाली दुकानें सरेण्डर हो चुकी हैं। पिछली सुनवाई के बाद हुए घटनाक्रमों के बाद सरकार द्वारा जारी अल्प अवधि के ठेकों में आरक्षित मूल्य पिछले साल के ठेकों से 20 फीसदी कम कर दिया गया। वहीं शेष अवधि के लिए बुलाए गए टेण्डरों में आरक्षित मूल्य ही हटा दिया गया। इसी तरह बीते 9 जून से आबकारी विभाग द्वारा संचालित की जा रहीं दुकानों में बिक्री का आँकड़ा घटकर 30 फीसदी हो गया और सरकार याचिकाकर्ता ठेकेदारों से शत-प्रतिशत लाइसेन्स फीस वसूलना चाह रही थी। इन आरोपों को लेकर शराब ठेकेदारों द्वारा दायर अर्जी पर युगलपीठ ने सरकार को 22 जून तक जवाब पेश करने के निर्देश देकर अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की है। 27 याचिकाओं पर हुईं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, नमन नागरथ, अधिवक्ता संजय अग्रवाल, संजय वर्मा, राहुल दिवाकर, हिमान्शु मिश्रा, कपिल बाधवा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सौरभ मिश्रा ने पक्ष रखा।
लॉकडाउन के दौरान संकटों का सामना कर रहे न्यायिक कार्य से जुड़े लोगों को सहायता देने के मामले पर हाईकोर्ट में अब 20 जुलाई को सुनवाई होगी। सीजे की अध्यक्षता वाली बैंच के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम की ओर से अधिवक्ता रवीन्द्र गुप्ता व सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने पक्ष रखा। श्री कौरव ने युगलपीठ को बताया कि अब तक प्रदेश के 549 अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता पहुँचाई गई है। उसकी सूची रिकार्ड में शामिल करने के निर्देश देकर युगलपीठ ने सुनवाई मुल्तवी कर दी।
चिरायु और बंसल अस्पताल के मामले में हकीकत बताने सरकार को मोहलत-भोपाल के चिरायु और बंसल अस्पताल को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए अधिकृत करके उन्हें करोड़ों रुपए का फायदा पहुँचाने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर सीजे की अध्यक्षता वाली बैंच ने बुधवार को सुनवाई की। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने महाधिवक्ता को कहा कि वे हलफनामा पेश करके हकीकत का ब्यौरा पेश करें। मामले पर अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी। भोपाल के भुवनेश्वर मिश्रा की ओर से दायर इस याचिका में आरोप है कि वहाँ पर हमीदिया व एम्स जैसे सरकारी अस्पताल हैं जहाँ पर इलाज की बेहतर सुविधाएँ मौजूद हैं, उसके बाद भी निजी अस्पतालों को फायदा पहुँचाने के इरादे से उन्हें कोविड अस्पताल घोषित किया जाना अवैधानिक है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत चौरसिया व सरकार की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने पक्ष रखा।
प्रवासी मजदूरों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिला या नहीं?-हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि कोरोना संकट के दौरान दूसरे राज्यों से वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को शासकीय योजना का लाभ मिला या नहीं? सीजे की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की है। बंधुआ मुक्ति मोर्चा की ओर से दायर याचिका में आरोप है कि प्रवासी मजदूरों को प्रदेश में योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से उनकी हालत काफी दयनीय हो गई है। आरोप के समर्थन में कुछ मजदूरों के उदाहरण याचिका में दिए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शन्नो शागुफ्ता खान की दलीलों को सुनने के बाद युगलपीठ ने राज्य सरकार व अन्य को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/liquor-contractors-surrendered-63-percent-shops-127421732.html
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