Tuesday, December 31, 2019

काेणार्क की तर्ज पर बना है ये सूर्य मंदिर; जहां पड़ती है सूर्य की पहली किरण

ग्वालियर. काेणार्क के प्राचीन सूर्य मंदिर की तर्ज पर ग्वालियर में गाेला का मंदिर क्षेत्र में स्थापित यह विस्वान (सूर्य) मंदिर अपने आप में अनूठा है। सूर्य के रथ के आकार वाले इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान भास्कर की प्रतिमा है। मंदिर के विशेष शिल्प में चाराें ओर बनाए गए झराेखाें से सूर्य की राेशनी सीधे पद्मासन में विराजी सूर्य की प्रतिमा पर पड़ती रहती है।

सात अश्वाें वाले रथ में समय के प्रतीक हैं 24 पहिए : संगमरमर के चबूतरे पर 7 अश्वाें द्वारा खींचे जा रहे रथ की आकृति में दाेनाें तरफ कुल 24 पहिए बनाए गए हैं। ये पहिए वर्ष के 24 पखवाड़ाें काे दर्शाते हैं।


ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य का समन्वित स्वरूप: गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य का समन्वित स्वरूप है। दाे हाथाें में कमल से सूर्य और विष्णु। दाहिने हाथ में त्रिशूल से शिव और बांये में माला ब्रह्मा की प्रतीक है।

मुख्य सभागृह में तीन द्वार, प्रत्येक पर 4-4 स्तंभ : मंदिर के मुख्य सभागृह में तीन द्वार हैं। प्रत्येक द्वार पर 4-4 स्तंभ बनाए गए हैं। इन पर 373 मूर्तियां विराजमान हैं। इनमें नवग्रह, चतुर्भुजी गणेश, द्वादश सूर्य, दशावतार के रूप हैं।



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ग्वालियर में गाेला का मंदिर क्षेत्र में स्थापित यह विस्वान (सूर्य) मंदिर अपने आप में अनूठा है।
सूर्य के रथ के आकार वाले इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान भास्कर की प्रतिमा है।


source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/this-sun-temple-is-built-on-the-lines-of-the-ancient-sun-temple-of-kanark-where-the-first-ray-of-the-sun-falls-126409943.html

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