चारों ओर बैक वाटर से घिरे इस टापू पर सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर पड़ी थी। यहां तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ जल मार्ग ही है। उन्होंने यहां पहुंचकर रात भी बिताई थी। वन विभाग ने यहां उनके लिए अस्थायी कॉटेज लगाए थे। इसके बाद ही उन्होंने यहां पर्यटन विकास की घोषणा की थी। पर्यटन निगम ने तत्काल 5 करोड़ का बजट पास कराया। निर्माण कार्य भी हुए। बिजली पहुंचाई गई। यह काम पूरा हुए एक साल गुजर चुका है, लेकिन निगम ने इधर पलटकर नहीं देखा। टापू के मवेशी इन भवनों में गंदगी कर रहे हैं। मैदान पर घास उग आई है। फर्श टूट-फूट रही है। चारों और पानी भरा होने से कोई अफसर भी यहां नहीं पहुंच पाते।
400 एकड़ में फैला है टापू
पूर्व सीएम की रुचि और पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने 400 एकड़ में फैले टापू पर कुछ जंगली जानवर भी छोड़े थे। इनमें चीतल, भालू, बारह सिंगा, नील गाय, बंदर आदि हैं। प्रचार-प्रसार नहीं होने से पर्यटकों को इस टापू की जानकारी ही नहीं है। यदि निगम यहां व्यवस्थाएं जुटाएं तो पर्यटकों का आवागमन हो सकता है।
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source https://www.bhaskar.com/mp/khandwa/news/5-crore-expenses-are-still-deserted-126407188.html
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