Tuesday, December 31, 2019

देर रात चले कवि सम्मेलन में कवि शर्मा बोले - बादल के टुकड़े सी कोमल, वो (रानी रूपमती) ऐसी थी जैसे मखमल

मांडू. मांडू महोत्सव की चौथी रात संगीत और कवियों के नाम रही। मंगलवार को मांडू उत्सव में पंडित देशराज वशिष्ठ का वायलिन वादन हुआ। पंडित वशिष्ठ ने अपने वायलिन वादन से तीन ताल के साथ कई राग प्रस्तुत किए। वहीं, कवियों ने हल्की फुल्की बातों से लेकर गंभीर विषयों व इतिहास को लेकर कटाक्ष कर दाद बटोरी। कवयित्री शायरा शबीना अदीब ने मां शारदे वरदान दो... से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। पं. देशराज वशिष्ठ ने अंग शैली में वादन किया। उन्होंने समय के अनुसार राग बजाया। किरवानी राग में विलंबित एक ताल में रचना और मध्य लय तीन ताल में बहुत सुंदर रचना प्रस्तुत की। उसके बाद केसरिया बालम आवो नी राग मांड प्रस्तुत किया। अंत में राग मिश्र खमाज में सुप्रसिद्ध भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए पीर पराई जाने रे की प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया। पंडित वशिष्ठ के साथ तबले पर पंकज राठौर संगत की। तानपुरा पर रेखा राठौड़ ने संगत की।

देर रात तक ठहाकों से ऐतिहासिक नगरी गूंजी
मंगलवार रात श्रोताओं ने काव्य के रस में गोते लगाते हुए नववर्ष का स्वागत किया। ठंड भी काव्य प्रेमियों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। कवियों ने हल्की फुल्की बातों से लेकर गंभीर विषयों व इतिहास को लेकर कटाक्ष कर दाद बटोरी। कवयित्री शायरा शबीना अदीब ने मां शारदे वरदान दो... से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। अदीब ने गजल पढ़ते हुए कहा खामोश लब है झुकी है पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है, जो ख़ानदानी रईस है वो मिज़ाज रखते हंै नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नई-नई है। कवि सर्वेश अस्थाना ने भ्रष्ट नेता की गिरगिट से तुलना करना महापाप है, क्योंकि रंग बदलने में भ्रष्ट नेता गिरगिट का भी बाप है, सुनाया। धार के अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि संदीप शर्मा ने अपनी चिर परिचित शैली में हंसते-हंसाते अपनी नई रचना रूपमती पहली बार मंच से पढ़ी। जिसमें उन्होंने कहा बादल के टुकड़े सी कोमल, वो ऐसी थी जैसे मखमल, श्रद्धावंत पवित्र नदी सी वो बहती थी कल-कल। वह ऐसी थी फूल कमल का वह जैसे टुकड़ा मलमल का। उसने पाया रूप अनोखा, उससे रिझा भूप अनोखा।


कई सम्मान प्राप्त कर चुके हैं पं. देशराज
पं. देशराज वशिष्ठ देश के जाने-माने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक एवं वायलिन वादक हैं। जिन्होंने देश के सुप्रसिद्ध बड़े-बड़े मंचों पर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी है। बड़े-बड़े सम्मान भी उन्हें संगीत के क्षेत्र में मिल चुके हैं। उन्होंने तानसेन समारोह ग्वालियर, स्वामी हरिदास संगीत समारोह मथुरा, अस्सी घाट बनारस, दिल्ली फेस्टिवल, उत्तराधिकार भोपाल, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, भातखंडे संगीत समारोह धार, पद्मश्री फड़के संगीत समारोह धार, फैयाज खान संगीत समारोह ग्वालियर, झांसी महोत्सव, पंडित गुणवंत व्यास संगीत समारोह रायपुर छत्तीसगढ़, नाग ज्योति संगीत समारोह भोपाल, सिद्धा संगीत समारोह उज्जैन, शासकीय एवं गैर शासकीय स्थानों पर अनेक प्रस्तुति पंडित जी द्वारा दी है।

गुरु-शिष्य परंपरा में धार में करते हैं मासिक सभा
गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत पं. देशराज धार में मासिक सभा भी करते हैं। हर महीने यह सभा नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत की ओर प्रेरित करने के लिए की जाती है। शास्त्रीय संगीत का प्रचार-प्रसार करने के लिए पंडित देशराज ने परंपरा प्रारंभ की है। इसमें देश के ख्याति प्राप्त कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं।

मांडू उत्सव के मंच को नई ऊंचाई दे गया संगीत का यह नया प्रयोग
2019 की आखिरी शाम अंतरिक्ष रॉक बैंड की धुन पर रंगीन हो गई। मांडू उत्सव में देशी-विदेशी सैलानी जमकर थिरके। अपने नाम के अनुरूप प्रस्तुति देकर अंतरिक्ष रॉक बैंड ने मांडू उत्सव को नई ऊंचाइयांे पर पहुंचा दिया। वेस्टर्न म्यूजिक को हिंदी में तब्दील कर जब वरुण राजपूत ने कार्यक्रम की शुरुआत की तो युवाओं का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। लगभग ढाई घंटे तक मांडू से मौजूद हर वर्ग के दर्शक झूमते रहे। एक से बढ़कर एक से बढ़कर एक गीतों और दोनों की प्रस्तुति से समां बांधा।

रॉक बैंड दल में वरुण राजपूत के साथ जोशुआ पीटर, श्रीकांत विश्वकर्मा ने थॉमस रॉक बैंड के माध्यम से ऐसा सुर छेड़ा कि सर्द हवा भी सुर और ताल में बहने लगी। वरुण राजपूत ने अपने एल्बम के साथ कुछ पुरानी फिल्मों के गीत गाए। उन्होंने अपने गीत ओ हमदम सुनियो रे व दिन शगुफा-शगुफा न जाने क्यों मेरा यह दिल घबराए जैसे सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति दी। शंकर एहसान लॉय पे एआर रहमान, विशाल शेखर के गीतों को भी मांडू उत्सव के मंच से सुनाया।



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मांडू उत्सव में हॉट एयर बलून सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा।
रॉक बैंड दल में वरुण राजपूत ने प्रस्तुति दी।
पंडित देशराज वशिष्ठ ने वायलिन की धुन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कवियों ने अपने कविता पाठ से लोगों को जमकर गुदगुदाया।
मांडू उत्सव में लोगों ने आसमान की सैर की।
पर्यटकों ने रात में सर्द रात का अलाव जलाकर मजा लिया।
वाटर बोट का भी किया एंज्वाय।
उत्सव में सुबह की शुरुआत योग से।
हाट एयर बलून में मांडू को निहारते पर्यटक।
सेल्फी का भी यहां दिखा क्रेज।


source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/mandu-utsav-pandit-deshraj-vasistha-performed-the-violin-126409962.html

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