आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान को बचाने के लिए रौन क्षेत्र के गौरई गांव के किसानों ने अनूठी पहल की है। गांव के लोगों ने चंदा कर गांव में ही अस्थायी गोशाला बना दी है। इससे उनकी फसल बच रही है, साथ ही मवेशियों को ठंड से बचाव के साथ चारा पानी मिल रहा है। अस्थायी गोशाला में 400 से अधिक मवेशियों को रखने के साथ गांव के लोगों द्वारा उनकी देखभाल की जाएगी।
गौरतलब है कि गांव के लोगों को रात-रातभर खेतों पर जागते हुए मवेशियों से अपनी फसल को बचाना पड़ता था। उसके बाद भी मवेशी किसानों के खेतों में घुसकर फसल को चरने के साथ नुकसान पहुंचाते थे। इस समस्या के निराकरण के लिए ग्रामीणों द्वारा जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की गई। लेकिन उसके बाद भी हालात जस के तस बने रहे, जब शासन और प्रशासन से मदद की उम्मीद हारने के बाद ग्रामीणों ने स्वयं के खर्च पर गांव के बाहर गोशाला बनाने का निर्णय लिया। गांव के लोगों ने तार फेंसिंग कर और तिरपाल लगाकर अस्थायी गोशाला बना दी है।
अब समिति का भी करा रहे रजिस्ट्रेशन
ग्रामीण टिंकू चौहान ने बताया कि गौशाला की व्यवस्था के लिए सभी ग्रामवासी स्वैच्छिक सहयोग दे रहे हैं। सहयोग राशि से गोशाला की व्यवस्थाओं को और बेहतरीन बनाया जाएगा। वहीं ग्रामीणों द़ारा गोशाला की समिति रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं गोशाला की जिम्मेदारी जसराम सिंह,दीवान सिंह, अर्जुन सिंह, कैलाश और लाल सिंह को दी गई है। इसके साथ ही पूरा गांव पशुओं की देखभाल में जुटा हुआ है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/bhind/news/cattle-were-harming-crops-villagers-built-cowshed-128003492.html
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