जिला अस्पताल के बाद सबसे बड़ा स्थानीय सिविल अस्पताल जहां सीजन में करीब 500 मरीजों की ओपीडी प्रतिदिन होती है। ऐसा अस्पताल अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ, सर्जिकल स्पेशलिस्ट, मेडिकल स्पेशलिस्ट के अलावा स्वास्थ्य विभाग के कई पद खाली पड़े हैं। जिस कारण स्थानीय लोगों को सिविल अस्पताल से स्वास्थ लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्टाफ की कमी के कारण बड़ी संख्या में मरीजों को यहां से जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जिस कारण मरीजों को परेशानी हो रही। नवंबर माह से लेकर अभी करीब 25 गर्भवती महिलाओं एवं 15 शिशुओं को रेफर किया गया है। जो शिशु एवं निश्चेतना विशेषज्ञ न होने के कारण उन्हें इलाज के अभाव में यहां से रेफर किया गया है। इसके अलावा नेत्र चिकित्सक नही होने के कारण आंख के मरीज भटक रहे है। वहीं एक्स-रे नहीं होने के कारण पुलिस स्टाफ सहित पीड़ित परेशान हो रहे है।
विधानसभा में भोपाल मंडल का बड़ा रेलवे जंक्शन स्टेशन सहित 8 रेलवे स्टेशन है। रिफाइनरी, जेपी पाॅवर प्लांट, धनौरा पॉवर ग्रेट सहित औद्योगिक नगरी है। रेलवे जंक्शन एवं औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां पर घटना भी अधिक होती है। वहीं रेलवे जंक्शन एवं रिफाइनरी से सबसे ज्यादा राजस्व सरकार को मिलता है। बावजूद शहर की सिविल अस्पताल के खस्ता हाल है। अस्पताल में स्टाफ की कमी एवं संसाधनों की कमी के चलते बड़ी संख्या में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
जानकारी अनुसार करीब एक साल पहले डॉक्टर हिमांशु शर्मा का तबादला अशोक नगर हो जाने के कारण अस्पताल में तभी से शिशु रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण अस्पताल से प्रतिमाह 10 से 15 शिशुओं को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। नवंबर माह से लेकर अब तक करीब 15 बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया जा चुका है।
इसी तरह करीब 4 साल पूर्व नेत्र चिकित्सक पीके जैन का तबादला खुरई होने के बाद से यहां नेत्र चिकित्सक का पद तभी से खाली पड़ा है। उनके स्थान पर नेत्र सहायक के द्वारा मरीजों की आंखों का इलाज किया जा रहा था। लेकिन कोरोना योद्वा की मौत हो जाने के बाद से ही पद खाली पड़ा हुआ है। जिस कारण आंख के मरीज इलाज कराने के लिए दर-दर भटक रहे है।
रेडियोग्राफर की मौत के बाद एक्स-रे नहीं
तीन माह पहले कोरोना योद्धा रेडियोग्राफर की मौत होने के बाद से ही सिविल अस्पताल में एक्सरे नहीं हो रहे है। गरीब तबके के लोगों को प्राइवेट में महगें दामों में एक्स-रे कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा लड़ाई झगड़े में घायल हुए मरीजों एवं पुलिस केस वाले मामलों में किए जाने वाले एक्स-रे के लिए पीड़ित एवं पुलिस दोनों परेशान हो रहे है। पुलिस मामले में किए जाने वाले एक्स-रे या तो खुरई या फिर सागर में करवाने पड़ रहे है। एक्स-रे मशीन भी खराब, जिसका सुधार कार्य किया जा रहा है।
लोगों के नहीं हो पा रहे सिजेरियन आपरेशन
करीब दो माह पहले निश्चेतना विशेषज्ञ डॉक्टर आरके जैन का तबादला भोपाल होने के कारण तभी से निश्चेतना विशेषज्ञ की कमी है। इसके चलते सिवल अस्पताल में सिजेरियन आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। प्रसूतिका की स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें जिला अस्पताल सागर रेफर किया जा रहा है। पिछले माह नवंबर से लेकर अभी तक करीब 25 महिलाओं को सागर रेफर किया जा चुका है। इसके अलावा सर्जिकल स्पेशलिस्ट का करीब आठ साल और मेडिकल स्पेशलिस्ट का पद पांच साल से खाली पड़ा है। जिसके काफी आसुविधा होती है।
6 स्टाफ नर्स समेत कई पद खाली पड़े
सामान्य एमबीबीएस चिकित्सक शहरी व सिल्म डिस्पेंसरी में कई चिकित्सकों के पद खाली पड़े है। 6 स्टाफ नर्स पद खाली पड़े है। आया के चार, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, डाटा इंट्री ऑपरेटर के तीन पद, लिपिक, वार्डबाॅय के दो पद खाली है। आगासौद व भानगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में भी चिकित्सक के पद खाली हैं। मंडी बामोरा में स्त्री रोग विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ व शिशु रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। बीएमओ संजीव अग्रवाल का कहना है कि यह मामला जानकारी में लेकिन जितना भी स्टाफ है उससे काम चला रहे हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/bina/news/civil-hospital-itself-sick-how-patients-are-improving-x-rays-not-being-done-for-three-months-127998110.html
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