कुछ साल पहले तिलवाराघाट को पक्का किया गया और इसको चीप लगाकर सँवारा गया। एक दो साल तक तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अब यह घाट हर बारिश में टूटकर बिखर रहा है। इसके तट के किनारे खड़े होने पर लगता ही नहीं है कि यहाँ पर करोड़ों रुपयों से कभी विकास कार्य हुये थे। बड़ा हिस्सा बर्बाद हो चुका है। इस बार की बारिश में नर्मदा जब उफान पर आई तो घाट की चीप तेज बहाव में यहाँ-वहाँ बिखर गई। जैसे एकदम बाढ़ के बाद बर्बादी जैसा आलम होता है ठीक वैसा ही नजारा इन दिनों यहाँ दिखाई दे रहा है। डक्ट ब्रिज और फोर लेन के लिए बनाये गये नये ब्रिज के नीचे तो लगता ही नहीं है कि यहाँ पर कभी विकास कार्य हुये थे। पूरा घाट बारिश के दिनों में ही मरम्मत माँग रहा है।
रही कसर गंदगी पूरी कर रही| घाट बिखरा-बिखरा सा है तो रही कसर यहाँ पर गंदगी भी पूरी कर रही है। किनारों के हिस्सों में हो या फिर जहाँ पर दुकानें लगती हैं पूरी तरह से गंदगी फैली हुई है। नर्मदा तट के किनारे जो सुंदरता होनी चाहिए, कम से कम अभी वह बिल्कुल दिखाई नहीं देती। सफाई के प्रति इस घाट में वैसे भी लंबे समय से अनदेखी हो रही है। नगर निगम ने कुछ सफाई कर्मियों को यहाँ पर तैनात जरूर किया है पर नियमित सफाई का अभाव है जिससे हर तरफ गंदगी जमा है।
गुणवत्ता पर भी सवाल
जानकारों का कहना है कि घाट में निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब घाट बनाया जा रहा था तो यह जरूर सोचना चाहिए था कि नर्मदा बारिश के समय पर तो उफान पर आयेगी ही। यहाँ एक दो बार बारिश के समय बाढ़ जैसे हालात तो बनेंगे ही और इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर घाट को बनाया जाना चाहिए था, पर अभी की स्थितियों को देखकर लगता है कि जैसे इन सब बातों का पूर्व में निर्माण के समय ध्यान ही नहीं दिया गया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/tilwaras-ghat-broke-apart-in-the-fast-flow-of-narmada-large-number-of-rips-broke-out-127687199.html
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