Friday, September 25, 2020

खेतों में पानी जमा होने से सड़ने लगी सोयाबीन की फसल, कपास भी हुआ बर्बाद; सर्वे की दरकार

इस बार के खरीफ सीजन ने किसानों को रुला दिया है। पहले लगातार बारिश से अफलन की स्थिति बनी। इसके बाद अतिवृष्टि से फसलें बह गईं तो वहीं खेतों में पानी में ही गल गई। अब खेतों में जमा पानी से फसलें सड़ने लगी हैं। जब फसलों के पकने का समय आया तो खेतों में जो बची फसलें हैं उसे भी किसान नहीं काट पा रहे हैं। खेतों में पानी भरा होने के साथ ही कीचड़ में पैर गड़ रहे हैं। बची फसल को खेत से निकालने की भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। पकी फसलों के दाने भी दागी हो गए हैं और कम फली होने से बीज निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
क्षेत्र के बिजोरा माफी में ऐसे कई किसान हैं, जिनकी फसलें खेतों में पानी जमा होने से सड़ गई हैं। किसान पूनमचंद ने 7 एकड़ में कपास लगाया था, लेकिन बारिश के कारण पूरा कपास सड़ गया है। जब पूनमचंद अपने खेतों में कपास देखने गए तो उनके चेहरे की रौनक उड़ गई, क्योंकि खेतों में 1 से 2 फीट पानी भरा हुआ था और कपास पूरा तरह सड़ गया था। इससे किसान को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे कई किसान हैं, जिनकी सोयाबीन की फसलें भी खेतों में ही पूरी तरह सड़ गई हैं।
सर्वे टीम अभी तक नहीं पहुंची खेतों में
अधिक बारिश से फसलें खराब होने के बाद भी खेतों में सर्वे करने वाली टीम अभी तक नहीं पहुंच पाई है। जबकि कृषि मंत्री कमल पटेल ने संत सिंगाजी में कहा गया था कि किसानों का काफी नुकसान अति बारिश के कारण हुआ है और खेतों का सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर को निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन आज तक कोई भी सर्वे के टीम नहीं पहुंची।
किसान बोले- सरकार की घोषणाएं झूठी
‌क्षेत्र के बिजोरा माफी सहित जलकुआं, धारकवाड़ी, मोहद, गोराड़िया, कावड़िया खेड़ा सहित अन्य गांवों के किसानों की फसलें खराब हो चुकी हैं। इधर प्रदेश सरकार सिर्फ मंच से झूठी घोषणाएं कर रही हैं कि हम सर्वे की टीम खेतों में भेज रहे हैं किसानों का कहना है कि क्या फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी तब सर्वे की टीम खेत में आएगी। किसानों ने यह भी बताया कि अभी तक बीमा राशि भी नहीं मिल पाई है।

इधर, किसानों की परेशानी बढ़ी, उपज विक्रय में आ रही दिक्कत

सकल व्यापारियों के बाद कर्मचारी भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

हरसूद | मंडी एक्ट की खामियों से सकल व्यापारी संगठन की हड़ताल के दूसरे दिन कृषि अध्यादेश को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंडी कर्मचारी भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे क्षेत्र में किसानों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को क्षेत्र के कृषक उपज विक्रय के लिए परेशान होते नजर आए। इधर, व्यापारियों व कर्मचारियों की हड़ताल से मंडी प्रांगण में सन्नाटा पसरा हुआ है।
शुक्रवार से संयुक्त संघर्ष मोर्चा मंडी कर्मचारी के आह्वान पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए कर्मचारियों की प्रमुख मांग कृषि अध्यादेश के कारण उनके आर्थिक हितों पर हो रहे असर को लेकर है। मोर्चा ने मांग की है कि वेतन भत्ते व पेंशन की गारंटी प्रदेश सरकार लेें। यहां बता दे कि अध्यादेश के पूर्व तक वेतन भत्ते व पेंशन का भुगतान मंडी शुल्क से किया जाता था, लेकिन मोर्चा का मानना है कि आगामी 3-4 माह से इस व्यवस्था में दिक्कतें आएंगी। इसलिए प्रदेश सरकार को मंडी कर्मचारियों के आर्थिक हितों की जिम्मेदारी लेना चाहिए। पहले दिन प्रभारी मंडी सचिव आर एस भादनेकर, एमके मालवीय, अनिल राठौर, मुकेश व अन्य ने मंडी गेट के समक्ष नारेबाजी की। मंडी में अनाज तिलहन, दलहन के सकल व्यापारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। तौल की परेशानी के चलते बाहरी व्यापारी भी खरीदी नहीं कर पाए। किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ा। मंडी कर्मचारियों की हड़ताल से प्रांगण के स्टॉक माल की अनुज्ञा भी जारी नहीं हुई।
टैक्स कम करने की मांग
^सकल व्यापारी संघ की हड़ताल मंडी टैक्स कम करने तथा अनुज्ञा प्रथा बंद किए जाने तक जारी रहेगी। हमारी मांग है मंडी टैक्स 50 पैसे सैकड़ा किया जाए।
- राहुल सिंह गेहलोद, पूर्व व्यापारी प्रतिनिधि, हरसूद मंडी
मांग पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
^कृषि अध्यादेश से कर्मचारी के वेतन भत्ते व पेंशन प्रभावित हो रहे हैं। मोर्चा की मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल चलती रहेगी।
आरएस भाड़नेकर, प्रभारी मंडी सचिव



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Soybean crop rotting due to accumulation of water in fields, cotton also wasted; Survey needed


source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/soybean-crop-rotting-due-to-accumulation-of-water-in-fields-cotton-also-wasted-survey-needed-127754576.html

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