मंडी शुल्क 1.70 रुपए से घटाकर 50 पैसे की मांग को लेकर जिला मुख्यालय सहित हरसूद, पंधाना व मूंदी की मंडियों में ताले लग गए। 500 से ज्यादा व्यापारियों ने खरीदी बंद कर दी है। हड़ताल के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। नई फसल निकलने के बाद किसान घाटे का सौदा कर उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं। इधर मंडी कर्मचारियों ने भी सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में माेर्चा खोल दिया है।
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने आश्वासन के बाद भी हमारी मांगों नहीं मानी। अब मांगें पूरी होने के बाद ही हड़ताल खत्म करेंगे। ज्यादातर व्यापारी गांवों में जाकर 3500-3700 रुपए क्विंटल की सोयाबीन के 2700-2800 रुपए में माल खरीद रहे हैं। इसके अलावा मंडियों के बाहर गली-मोहल्लों में भी औने-पौने दाम पर किसानों का माल खरीदा जा रहा है, जबकि यहां कोई मंडी टैक्स भी नहीं लगता।
एक बार टाल चुके आंदोलन, आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो फिर बैठे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
जिले की सभी मंडियों में तैनात करीब 150 कर्मचारियों ने शुक्रवार को मंडी प्रांगण में हड़ताल शुरू कर दी। कृषि उपज मंडी संघ अध्यक्ष नारायण दशोरे ने कहा सरकार ने मंडी कर्मचारियों के साथ वादाखिलाफी की है। 6 सितंबर को दिए गए आश्वासन के बाद कार्यवाही नहीं होने से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस दाैरान संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा रणनीति बनाकर आंदोलन किया जाएगा। मोर्चा द्वारा 3 से 6 सितंबर तक अांदाेलन की चेतावनी दी थी तब कृषि मंत्री द्वारा फोन पर की गई चर्चा में पेंशन व्यवस्था, वेतन व अन्य मांगों की सुनिश्चितता करने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही 15 दिन के अंदर कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए थे।
इन मांगों पर अड़े व्यापारी
- मंडी शुल्क 0.50 पैसे किया जाए।
- निराश्रित शुल्क को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- परिवहन पर लागू अनुज्ञा पत्र को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- पाक्षिक पत्र, वार्षिक असीसमेंट जैसे जटिल कार्यों को समाप्त किया जाए।
- मंडी लाइसेंस आजीवन जारी किया जाए। हर पांच साल में नवीनीकरण की जरूरत न हो।
व्यापारी... सरकार को मंडी शुल्क 50 पैसे प्रतिशत करना चाहिए
क्रेता-विक्रेता संघ ने मंडी सचिव को ज्ञापन देकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। मंडी क्रेता-विक्रेता संघ अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल, सचिव अतुल अग्रवाल ने कहा कि सरकार को मंडी शुल्क 50 पैसे प्रतिशत करना चाहिए। टैक्स को लेकर पूर्व में भी ज्ञापन दे चुके हैं। सरकार की अनदेखी के चलते प्रदेश के सभी व्यापारी हड़ताल पर है। इन दिनों में हड़ताल के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। क्योंकि इन दिनों में सोयाबीन, मक्का, कपास की आवक बड़ी मात्रा में होती है। व्यापारियों के साथ ही किसानों का भी नुकसान हो रहा है।
किसान... नई फसल आने पर ही क्यों करते हैं हड़ताल
भारतीय किसान संघ जिला संयोजक सुभाष पटेल ने कहा मंडी हड़ताल से किसानों को परेशानी हो रही है। व्यापारियों के बाद मंडी कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर दी है। कर्मचारियों की हड़ताल तो ठीक है, लेकिन व्यापारियों की सुनियोजित हड़ताल है। क्योंकि हर बार नई फसल आने के बाद ही हड़ताल शुरू होती है। ऐसे में जरूरतमंद किसान कम दाम में उपज बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। कृषि अध्यादेश दो माह पहले लागू हुआ था। तब हड़ताल करना था। व्यापारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद मंडी में उपज का दबाव बढ़ जाएगा। ऐसे में किसानों को सही दाम नहीं मिलेगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/farmers-forced-to-deal-with-strike-losses-of-agricultural-market-workers-and-traders-127754568.html
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