Wednesday, September 2, 2020

बाढ़ से गल गई बेल, पाैधे भी बहे, सब्जियां हो गईं तीन गुना महंगी

अतिवृष्टि के कारण आई हरी सब्जियों की बाड़ियां और खेत की सब्जी फसल खराब हाे गई। ज्यादातर गांवाें में सब्जियों की बाड़ी पूरी तरह बर्बाद हुई हैं। बाड़ी में लगातार पानी भरा रहने से सब्जियों की पतली बेल गल गईं। पानी का बहाव तेज हाेने से पाैधे उखड़कर बह गए। बाढ़ के साथ वजनदार कूड़ा करकट कांटे आदि आने से नर्म पाैधे जमीन पर मिट्टी से चिपकने से नष्ट हाे गए। बाड़ियां चाैपट हाेने से सब्जी मंडी में आवक में गिरावट आई है। इससे सब्जी के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं। किचन का बजट गड़बड़ा गया। किसानों काे बाड़ी साफ कर दाेबारा सब्जियां लगाना हाेगा। करीब 30 से 45 दिन का समय लगेगा। इस बीच किसान की आय भी नहीं हाेगी। वहीं मुआवजा कब मिलेगा यह तय नहीं है। अभी सर्वे भी शुरू नहीं हुए हैं।

किसे क्या नुकसान

किसान काे नुकसान : सब्जी बेचने उगाने वाले किसान बताते हैं कि अब बाड़ी साफ कर दाेबारा नए सिरे से सब्जी लगाना पड़ेगा। नई सब्जियां आने में 30 से 45 दिन लगेंगे। खेत साफ करने व नए बाेवनी के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा। इस बीच उनकी 10 से 15 हजार रुपए की नियमित आय बंद हाे जाएगी।
आम लाेगाें काे नुकसान : बाजार में अभी सब्जियों की आवक घटी है। इससे मांग आपूर्ति का अंतर बढ़ा है। सब्जियां महंगी बिक रही हैं। सब्जियों में भी अब ज्यादा विकल्प नहीं मिल रहे हैं। तीन दाम बढ़ने से आम लाेगाें की पहुंच से दूर हाे रही है। काेई विकल्प नहीं हाेने से महंगी सब्जी खरीदना मजबूरी है।

बाढ़ के साथ आए कचरे से पाैधे जमीन पर बिछ गए : माखनलाल
अबगांव खुर्द के माखनलाल और उनके भाई चंपालाल कुशवाह ने 3 एकड़ में गिलकी, लाैकी, भिंडी, अदरक, अरबी आदि हरी सब्जियां लगाई थी। गिलकी व लाैकी फूल पर थी। भिंडी व अरबी लगने लगी थी। बाढ़ का पानी बाड़ी में भर गया। इससे बेल गल गईं। पानी का बहाव तेज हाेने से पाैधे उखड़ गए। फूल झड़ गए। बाढ़ के साथ आए कचरे से पाैधे जमीन पर बिछ गए। अब वे दाेबारा खड़े नहीं हाेंगे।

टमाटर की फसल बाढ़ में बही, 3 दिन भरा रहा पानी : माेहन पटेल
जुगरिया गांव के माेहन पटेल ने मलचिंग पद्धति से 2 एकड़ में 75 हजार रुपए खर्च कर टमाटर लगाए थे। खेत में 3 दिन बाढ़ का पानी भरा रहा। इससे पाैधे व बेल खराब हाे गए। पाैधे बाढ़ में बह गए। इधर, कायागांव के लखनलाल पटेल ने बताया कि उसकी 5 एकड़ में लगी ककड़ी बाढ़ से खराब हाे गई। दाेनाें किसानों काे लाखाें रुपए
का नुकसान हुआ।​​​​​​​

सब्जी खराब, खेत साफ करने में लगेंगे रुपए : मनाेज पटेल
आलनपुर गांव के किसान मनाेज पटेल ने 9 एकड़ में सब्जी लगाई थी। 30 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च आया। जुलाई के अंतिम सप्ताह में 3-3 एकड़ में लाेकी, गिलकी व करेला लगाया। फूल आने लगे थे। लाैकी आना शुरू हुआ। लेकिन तना मक्खी लगी और बाद में तेज बारिश से फसल पूरी बर्बाद हाे गई। अब खेत सफाई का खर्च
जेब से लगेगा।​​​​​​​

जिले में सब्जियों के दाम
सब्जी पहले अब
गिलकी 40-50 100-150 रु. किलो
लौकी 20-30 45-60 रु. किलो
करेला 30-40 50-60 रु. किलो
भिंडी 20-30 40-60 रु. किलो
टमाटर 20-30 60-80 रु. किलो
बैंगन 25-30 50-60 रु. किलो
हरी मिर्ची 30-40 50-60 रु. किलो
आलू 10-15 30-40 रु. किलो
पत्ता गोभी 20-30 40-60 रु. किलो
फूल गोभी 30-35 50-60 रु. किलो
शि. मिर्ची 25-30 60-80 रु. किलो​​​​​​​



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Fellows melted, floods also flowed, vegetables became three times more expensive


source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/harda/news/fellows-melted-floods-also-flowed-vegetables-became-three-times-more-expensive-127680638.html

No comments:

Post a Comment