शहर दो साल से ओडीएफ डबल प्लस है। यानी पब्लिक टॉयलेट में एक्जीक्युटिव क्लास की सुविधाएं मिलने का दावा है। लेकिन हकीकत यह है कि अरेरा कॉलोनी और एमपी नगर जैसे पॉश इलाकों में भी पब्लिक टॉयलेट में फर्श पर पानी फैला रहता है। हैंड ड्रायर खराब पड़े हैं। महिलाएं यदि इन टॉयलेट में पहुंच जाएं तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो जाए। ज्यादातर टॉयलेट में सैनेटरी नेपकिन उपलब्ध नहीं है।
इनकी मशीनें भी खराब पड़ी हैं। शहर में 225 से अधिक पब्लिक टॉयलेट और कम्युनिटी टॉयलेट हैं। लेकिन इनके हालात में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। केवल स्वच्छ सर्वे के समय एक-दो महीने के लिए यहां सुविधाएं देने की औपचारिकता की जाती है।
6 करोड़ 32 लाख में आनन-फानन में खरीदे थे मॉड्यूलर टॉयलेट
ओडीएफ डबल प्लस से पहले जनवरी 2017 में शहर को ओडीएफ का प्रमाण पत्र मिला था। उस समय ओडीएफ के अनुरूप व्यवस्था करना बड़ी चुनौती था। जिन घरों में टॉयलेट नहीं थे, वहां इनके बनाने के लिए समय नहीं था। पब्लिक टॉयलेट भी नहीं बन सकते थे। इस वजह से आनन-फानन में 6 करोड़ 32 लाख से 1938 मॉड्यूलर टॉयलेट खरीदे। यानी एक टॉयलेट की कीमत हुई 32 हजार। मॉड्यूलर टॉयलेट की कीमत को लेकर हुए विवाद के बाद एमआईसी ने इनका पैमेंट रोकने के निर्देश दिए थे।
तब से अब तक यह भुगतान रुका है। इनको 157 स्थानों पर लगाया गया। ज्यादातर मॉड्यूलर टॉयलेट छह माह भी नहीं चले। शाहपुरा, बाबा नगर, ईश्वर नगर, दुुर्गा नगर सहित कई क्षेत्रों में रखे इन मॉड्यूलर टॉयलेट के दरवाजे और छत छह महीने में ही उखड़ने लगे थे।
गूगल मैप पर लोकेशन लेकिन एंट्री का पता नहीं
भारत सरकार के दबाव में हर टॉयलेट की गूगल लोकेशन पोस्ट की गई है। आप गूगल मैप पर टॉयलेट लोकेट कर सकते हैं। लेकिन पास में जाने पर यह पता नहीं लगता कि एंट्री किधर से है। एंट्री दिखाने के लिए कोई संकेतक नहीं लगा है।
खुले में बहता है सीवेज- ज्यादातर टॉयलेट का सीवेज खुले नाले में छोड़ा जा रहा है। मानसरोवर कॉम्पलेक्स, एमपी नगर या शिवाजी नगर के किसी भी टॉयलेट में चले जाइए। फर्श पर पानी पड़ा हुआ मिलता है। गंदगी ऐसी कि भीतर जाने का मन न हो।
हैंड ड्रायर खराब- मानसरोवर कॉम्पलेक्स के पास बने पब्लिक टॉयलेट का हैंड ड्रायर खराब है। ऐसी ही कुछ स्थिति पॉश इलाके में शुमार बिट्टन मार्केट की है। इन दोनों जगहों पर सैनेटरी नेपकिन भी नहीं है। केयर टेकर को तो यह भी नहीं पता कि मशीन खराब है चालू।
225 से अधिक पब्लिक टॉयलेट और कम्युनिटी टॉयलेट हैं शहर में। लेकिन इनकी हालत में कोई सुधार नहीं है।
पब्लिक टॉयलेट में ओडीएफ डबल प्लस के मानकों के अनुसार कुुछ कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। मॉड्यूलर टॉयलेट तो ड्यूरेबल नहीं है। आज मैंने निरीक्षण किया, दो लोगों का स्पॉट फाइन भी कराया है। 2016 की परिस्थितियां मेरी जानकारी में नहीं है, लेकिन उनका पेमेंट भी नहीं किया गया है। - वीएस चौधरी कोलसानी, कमिश्नर, ननि
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/neither-cleaning-nor-basic-facilities-hand-dryer-is-bad-not-even-sanitary-napkin-127994210.html
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