नामकरण संस्कार के तहत नाम बालक की पहचान के साथ-साथ बालक के स्थूल व सूक्ष्म व्यक्तित्व को भी प्रभावित करता है। बालक के नाम के अनुरूप परिजनों को श्रेष्ठ व्यवहार करना व सदगुणों के विकास के लिए वातावरण भी तैयार करना पड़ता है। वातावरण का प्रभाव बालक के गुणों पर पड़ता है। बालक को जैसा वातावरण मिलता है। उसी अनुसार उसके गुण विकसित होते हैं। नामकरण संस्कार के माध्यम से शिशु रूप में जन्मी जीवात्मा को यज्ञीय लाभ पहुंचाने का प्रयत्न किया जाता है।
स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ पर परिव्राजक महेंद्रसिंह चौहान ने नामकरण संस्कार कराते हुए ऋषि संदेश दिया। उन्होंने कहा बालक में नाम के अनुरूप संस्कारों की स्थापना के लिए माता-पिता को अपने अशुभ व बुरे संस्कारों को क्षीण करने के लिए श्रेष्ठ चिंतन व मनन का अभ्यास करना होता है। माता पिता के मन की साधना का श्रेष्ठ चिंतन व अनुकूल परिस्थितियां बालक को उसके नाम के अनुरूप बनाती है। गायत्री परिवार की नैष्ठिक परिजन गेंदाबाई मालाकर का निधन होने पर उनकी आत्मिक शांति व सदगति के लिए गायत्री महायज्ञ में महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियां समर्पित की। गायत्री काॅलोनी में गेंदाबाई मालाकार के नाम से पं. रविंद्र दुबे बाल संस्कार शाला का संचालन करते हैं। बाल संस्कार शालाओं की स्थापना में मालाकार परिवार का योगदान रहा। भारतसिंह सोलंकी व अन्य गायत्री परिजन मौजूद थे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/khargone/news/the-best-practices-and-circumstances-of-the-mother-and-father-make-the-child-conform-to-the-name-128110388.html
No comments:
Post a Comment