कोई भी बेसहारा बिना छत के न सो सके इसके लिए सरकार ने रैन बसेरों का निर्माण तो करा दिया लेकिन जिम्मेदारी की उदासीनता के कारण रैन बसेरे पर ताला लटका हुआ था। इससे बेसहारों को ओटलों पर सोकर रात गुजारना पड़ रही थी। इस समस्या को लेकर दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। इस पर बुधवार को रैन बसेरे के ताले खुलवाकर उसकी साफ-सफाई कराई गई।
आमजनों का कहना है कि केवल ठंड ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष भर रेन बसेरे के गेट को बेसहारा लोगों के लिए खुला रहने दिया जाए। जिससे उन्हें ठंड, बारिश या गर्मी के समय में ओटलों पर सो कर रात नहीं गुजारना पड़े।
देखरेख के अभाव में नगर का रैन बसेरा अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण भवन लगातार जर्जर होता जा रहा है। बुधवार को नपा के कर्मचारियों द्वारा रैन बसेरे की साफ-सफाई की गई। कर्मचारियों ने बड़ी मात्रा में नपा के विभागों से जुड़े दस्तावेज को ट्राली में भरकर निकाला। रैन बसेरे में रखे यह दस्तावेज बरसात के पानी के कारण खराब हो गए हैं। उसे नपा से ही लगे एक स्टोर रूम में रखा गया है। इसके बाद उसकी सफाई की गई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/khargone/news/cleanliness-of-night-shelters-remove-two-trolley-waste-128096964.html
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