Monday, November 2, 2020

निजीकरण की लड़ाई में संविदा कर्मियों के अधिकारों को भूलना महँगा पड़ेगा

विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ सभी कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन करने की रणनीति तैयार की है। जिसके चलते संयुक्त मोर्चा का भी गठन किया गया है, जिसमें सभी कर्मचारी संगठनों को शामिल किया गया है मगर इस संगठन में अहम रोल अदा करने वाले संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी संगठनों में अंदर ही अंदर इस लड़ाई से अपने आप को दूर रखने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

इसका कारण निजीकरण के विरोध में वर्षों से लंबित बिजली संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की माँग धुंधली होना है। इन दोनों ही संगठनों के बीच से यह आवाज उठने लगी है कि वर्तमान में बिजली विभाग में 21 संगठन काम कर रहे हैं और सभी के हर आंदोलन में संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों की माँग शामिल की जाती है लेकिन जब संविदा एवं आउटसोर्स के नियमितीकरण पर संयुक्त मोर्चा में बात रखने का समय आता है तो कुछ कर्मचारी संगठन संविदा और आउटसोर्स की माँग से परहेज कर रहे हैं।


सातवाँ वेतन पाया फिर चुप हो गए

संविदा व आउटसोर्स कर्मी इस बार काफी आक्रोशित नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मियों का यहाँ तक कहना है कि वर्ष 2017 में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा गया था, जिसमें नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए सातवें वेतनमान की माँग पूरी हुई थी, मगर बिजली संविदा कर्मियों व आउटसोर्स कर्मचारियों की माँग का कुछ नहीं हुआ और इसके बाद किसी बड़े नेता या संगठन ने इनके बारे में फिर सोचा तक नहीं। अब एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी (निजीकरण का विरोध) चल रही है।



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It will be expensive to forget the rights of contract workers in the fight for privatization


source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/it-will-be-expensive-to-forget-the-rights-of-contract-workers-in-the-fight-for-privatization-127876808.html

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