अयोध्या बायपास स्थित द्वारकाधीश हवेली बिल्डर पर खुले में सीवेज छोड़ने और रहवासियों को दूषित भू-जल आपूर्ति करने के मामले में एनजीटी ने 30.20 लाख का जुर्माना लगाया है। प्रदेश में किसी बिल्डर पर जलप्रदूषण के मामले में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का यह संभवत: पहला मामला है। एनजीटी ने बिल्डर को 15 दिन में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू करने और रहवासियों को शुद्ध पेयजल सप्लाई शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। रहवासी रिटायर्ड मेजर जनरल हरप्रीत सिंह बेदी की याचिका पर एनजीटी ने बिल्डर को 15 दिन में जुर्माने की यह राशि जमा कराने का आदेश दिया गया है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय ग्राउंड वाटर बोर्ड अपने स्तर पर कार्रवाई करने और नुकसान के आकलन के हिसाब से अधिक हर्जाना वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। कंपनसेशन राशि नहीं चुकाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई कर सकते हैं। बिल्डर विजय सिंह का कहना है कि एनजीटी ने जो आदेश दिया है, हम उसका पालन करेंगे। हालांकि हमने आदेश के विरुद्ध अपील दायर की है इसकी सुनवाई 6 नवंबर को है। हमने नगर निगम से भी नर्मदा पेयजल लाइन का कनेक्शन ले लिया है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/3020-lakh-fine-on-builder-for-discharging-sewage-and-polluting-ground-water-in-the-open-127831683.html
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