Saturday, February 1, 2020

बोगस बिलों के मामले की जांच करने आई टीम, बंद साईं इंटरप्राइजेस को सील किया


बोगस बिल यानी बिना जीएसटी का भुगतान किए बिल लगाकर गड़बड़ी करने के मामले की जांच करने शनिवार को जीएसटी विभाग इंदौर के 30 ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों का दल आलोट पहुंचा। उन्होंने यहां दो दुकानों की जांच की और एक दुकान पर ताला मिलने पर उसे सील कर दिया। रविवार को यह दुकान खुलवाकर जांच की जाएगी। इसके साथ अन्य फर्मों की भी जांच होगी। जांच में क्या मिला यह अफसरों ने बताने से इंकार किया है।

31 दिसंबर को भास्कर ने प्रदेश की पंचायतों में सीमेंट-सरिया व अन्य सामग्री बेचने वाली फर्मों द्वारा बिना जीएसटी चुकाए बोगस बिल लगाकर शासन को नुकसान पहुंचाने का मुद्दा उठाया था। इस पर जिला पंचायत के साथ ही जीएसटी विभाग ने जांच शुरू की। जिले से इसकी जानकारी मंगवाने के बाद विभाग की टीम शनिवार दोपहर में आलोट पहुंची। इसमें रतलाम के असिस्टेंट कमिश्नर मुकेश मेड़ा व इंदौर सर्कल के असिस्टेंट कमिश्नर डॉ. संजयसिंह शामिल है। टीम सबसे पहले कॉलेज के सामने स्थित कान्हा इंटरप्राइजेस पर पहुंची। यहां दोपहर 3.30 बजे से शाम 7 बजे तक जांच चली। यहां रेत, गिट्‌टी, ईंट, मुरम के बिलों की जांच की और बहीखाते से रिटर्न भरने की जानकारी भी ली। इसके बाद भांभीपुरा स्थित श्री साईं स्टील पर पहुंची। यहां भी बिलों की जांच की। दोनों दुकानों के गोदाम पहुंचकर स्टॉक का भी मिलान किया। टीम कृषि उपज मंडी के पास स्थित साईं इंटरप्राइजेस पहुंची तो दुकान बंद मिली। इस पर अफसरों ने दुकान के ताले पर सील लगा दी। रविवार को दुकान खुलवाकर इसकी जांच की जाएगी। दुकानदार को सूचना दे दी गई है। असिस्टेंट कमिश्नर इंदौर डॉ संजय सिंह ने बताया टैक्स चोरी की आशंका पर इंदौर कमिश्नर राघवेंद्रसिंह के निर्देश पर गठित जांच दल ने जांच शुरू की है। जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्या स्थितियां मिली।

रावतखेड़ा पंचायत सचिव निलंबित हो चुके हैं- बोगस बिल यानी बिना जीएसटी के बिलों का भुगतान करने वाले ग्राम पंचायत रावतखेड़ा के सचिव वीरेंद्रसिंह झाला को 16 जनवरी को निलंबित किया जा चुका है। जिपं अकाउंट ऑफिसर प्रीति डेहरिया की जांच में सामने आया कि सचिव वीरेंद्रसिंह झाला ने नियमों की अनदेखी करते हुए बिना जीएसटी के बिलों का भुगतान कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।

कान्हा इंटरप्राइजेस पर जांच करते जीएसटी विभाग के अधिकारी।

ये है मामला

पंचायती राज अधिनियम में पंचायतों को 15 लाख रुपए निर्माण कार्यों के लिए जारी किए जाते हैं ताकि वे पंचायतों में निर्माण कार्य करवा सकें। उन्हें यह काम रजिस्टर्ड फर्म से करवाना होता है। वहीं निर्माण सामग्री की खरीदी ऐसी फर्म से खरीदी करना होती है जो जीएसटी में पंजीकृत हो। बावजूद इसके जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश की 300 जनपद और उनमें आने वाली पंचायतों में कबूतर बिल यानी फर्जी बिल के जरिए सीमेंट और सरिये पंचायतों को बेच दिए।



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Aalot News - mp news team to investigate the case of bogus bills sealed closed sai enterprises


source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/mp-news-team-to-investigate-the-case-of-bogus-bills-sealed-closed-sai-enterprises-063508-6527271.html

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