इसी प्रकार उनका योगेश्वर रूप और महाभारत में अर्जुन के पथ-प्रदर्शक वाला रूप सभी को लुभाता और प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फूहड़ कपड़ों का चलन बढ़ता जा रहा है, लेकिन हमें अंग प्रदर्शन करने वाले कपड़ों को धारण नहीं करना चाहिए। इस तरह के कपड़ों को पहनने से हमें अगले जन्म में पेड़ बनना पड़ता है। कथा में मुख्य यजमान गिरजा रानी शर्मा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन उपस्थित होकर कथा का रसपान कर रहे हैं।
हटा। भागवत कथा का श्रवण करतीं महिलाएं।
नाचगान व गाजे बाजे के साथ मनाया कृष्ण जन्मोत्सव
पथरिया। ग्राम किद्रहो में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान पूरा परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक अवधेश कृष्ण ने कहा कि उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्येक रूप मनोहारी है। उनका बालस्वरूप तो इतना मनमोहक है कि वह बचपन का एक आदर्श बन गया है, इसीलिए जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के इसी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें वे चुराकर माखन खाते हैं, गोपियों की मटकी तोड़ते हैं और खेल-खेल में असुरों का सफाया भी कर देते हैं। इसी प्रकार उनकी रासलीला, गोपियों के प्रति प्रेम वाला स्वरूप भी मनमोहक हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है तब तब भगवान अवतार लेते हैं। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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source https://www.bhaskar.com/mp/damoh/news/mp-news-people-living-in-joint-family-always-lead-a-happy-life-shastri-084551-6074999.html
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