इंटक के रतिराम यादव, एटक के हरीशंकर माहौर तथा सीटू के एमके जायसवाल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि आज आसमान छूती महंगाई में नाममात्र के वेतन पर काम कराया जा रहा है जबकि ट्रेड यूनियनें न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए करने की मांग कर रही हैं। ठेका प्रथा, संविदा, दैनिक वेतनभोगी प्रथा में कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। सरकारी क्षेत्र में नौकरियां खत्म की जा रही हैं। मोदी सरकार 2 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष सृजित करने की घोषणा करके सत्ता में आई है लेकिन अब यह सरकार रोजगार देने की बजाय छीनने में लग गई है। कारखानों में मजदूरों का शोषण बंद हो, सरकारी विभागों में संविदा, ठेका और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किए जाने, आंगनबाड़ी, आशा-ऊषा सहित संविदा कर्मियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, निर्माण मजदूर, बीड़ी मजदूरों, पल्लेदारों सहित असंगठित मजदूराें को कल्याणकारी योजनाओं को लाभ दिए जाने के लिए नीति बनाए जाने की मांग को लेकर 8 जनवरी को हड़ताल की जा रही है। 29 दिसंबर को मानमंदिर टॉकीज के सामने कबीर पार्क पर संयुक्त ट्रेड यूनियन का सम्मेलन किया जा रहा है। शहर में विभिन्न चौराहों व औद्योगिक क्षेत्रों में नुक्कड़ सभाएं की जाएंगीं। 7 जनवरी को शहर में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। 8 को फूलबाग पर हड़ताली कैंप लगाया जाएगा।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-eight-workers39-organizations-strike-transport-will-be-affected-074528-6266402.html
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