मलूत: होशंगाबाद जिले के निटाया के रहने वाले शिक्षक एमएल चौरे की आंखों में रोशनी नहीं है। शुरुआत में उनकी पढ़ाई नहीं हो सकी। पढ़ाई के लिए ब्रेल लिपि सीखने के लिए उन्होंने बैतूल जिले के पाढ़र स्कूल में प्रवेश लिया। हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। ब्रेल लिपि सीखने के बाद हाई व हायर सेकंडरी की परीक्षा बैतूल गंज के शासकीय स्कूल से की।
शिक्षक चौरे।
शिक्षक चौरे ने बैतूल में ब्रेल लिपि से की पढ़ाई
शिक्षक चौरे ने प्राथमिक पढ़ाई होशंगाबाद के निटाया की शासकीय स्कूल में की। इसके बाद बैतूल जिले के पाढ़र के दिव्यांग हॉस्टल में रहकर हाई व हायर सेकंडरी स्कूल की पढ़ाई की। तबीयत खराब होने से 10वीं की परीक्षा में 55% अंक और 12वीं में 67% अंक पाए। स्नातक व स्नातकोत्तर की परीक्षा भी चौरे ने प्रथम स्थान हासिल किया। 2003 में उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा दी और सफलता हािसल की।
हरदा। स्कूल में पढ़ाते हुए दृष्टि बाधित शिक्षक।
संगीत के शौकीन और समय के हैं पाबंद
संगीत के शौकीन शिक्षक चौरे की याददाश्त तेज है। उन्हें विद्यार्थियों के नाम, वे कब उपस्थित रहे, कब अनुपस्थित रहे, यह सब जुबानी याद है। वे समय के पाबंद है। रोजाना सुबह 10:30 से स्कूल पहुंच जाते है। समय पर क्लास लेते हैं।
कॉलेज में आॅडियाे सुनकर की पढ़ाई, रायटर ने पर्चा किया हल
एमएल चौरे के मुताबिक जयवंतीबाई शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में प्रवेश लिया। आर्ट्स से स्नातक किया। राजनीति व समाज शास्त्र में एमए और फिर बीएड किया। कॉलेज की पढ़ाई के लिए आॅडियो क्लीप सुनकर पाठ याद किया। परीक्षा के लिए उन्हें अलग से रायटर मिला। इसके माध्यम से पेपर दिए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/harda/news/mp-news-spirit-of-flight-first-time-teacher-now-teaching-084135-6085309.html
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