तहसील मुख्यालय से 13 किमी दूर निमरमुंडा गांव में एक किसान के खेत में बोर से सिंचाई के दौरान पंप में क्रिस्टल जैसा सफेद पत्थर निकला है। यह पत्थर आसपास के लोगों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है। किसान की सूचना पर पीएचई ने सेंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। जबकि प्रारंभिक जांच में भू वैज्ञानिक इसे क्रिस्टल पत्थर होना बता रहे हैं।
दरअसल निमरमुंडा के किसान कल्ला, सूरत सिंह ने अपनी फसल की सिंचाई बोर के पानी से की, तो उसकी फसल पीली पड़ गई। पानी का रंग सामान्य न होकर मटमैला जैसा था। कुछ देर तो सिंचाई हुई, लेकिन ज्यादा सिंचाई नहीं हो सकी और बोर में डले सबमर्सिबल पंप ने पानी फेंकना बंद कर दिया। जब पंप को बोर से निकाला गया तो पूरी पाइप लाइन व पंप में सेंधा नमक जैसा पदार्थ चिपका हुआ था, जिसे जीभ पर रखने पर उसका स्वाद नमक से भी खारा एवं कड़वा था।
किसान कल्ला सिंह, सूरत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में करीब एक माह पहले ही बोर कराया था। जिसकी गहराई 414 फीट है। पंप 207 फीट तक डाला गया। जब बोर किया गया था, तो उस दौरान 250 फीट तक नीले पत्थर एवं उसके बाद लाल पत्थर की धूल निकली थी। बीते सप्ताह ही उस बोर से सिंचाई प्रारंभ की गई है। जैसे ही इस बोर का पानी धनिया की फसल में दिया गया तो पानी में सफेद मट्ठा जैसा फैन था।
जहां-जहां सिंचाई की गई वहां वहां सफेद पदार्थ सा जम रहा था। कुछ देर चलने के बाद पंप भी बंद हो गया। जब पंप खोलकर देखा गया तो बडी़ मात्रा में नमक जैसा पदार्थ निकला। जिसके सेंपल हटा में पीएचई विभाग के अधिकारियों को दिखाए हैं।
पीएचई के ईई एचएल अहिरवार ने बताया कि विभाग के कर्मचारी को भेजकर वहां से पानी एवं पदार्थ के सेंपल एकत्र किए जा रहे हैं। जिसे जांच के लिए सागर एवं भोपाल भेजे जाएंगे। ओएनजीसी के देहरादून मुख्यालय पर संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि हमारी टीम जल्द ही उस गांव जाकर सर्वे करेगी।
इसका निर्माण दो प्राकृतिक तत्वों सिलिकॉन तथा ऑक्सीजन के मिश्रण से होता है
सामान्य तौर पर देखने से यह स्फटिक या क्वार्ट्ज लग रहा है। यह एक तरह की साल्टेड रॉक भी हो सकती है, पहली नजर में यह स्फटिक ही है, यह एक प्रकार का खनिज है। इसमें ग्रेनाइट एवं रेत का मुख्य घटक होता है। पृथ्वी की भू- पर्पटी पर पाए जाने वाले खनिजों में यह दूसरे क्रम पर आता है। इसका निर्माण दो प्राकृतिक तत्वों सिलिकॉन तथा ऑक्सीजन के मिश्रण से होता है, जब यह तत्व ताप और दाब की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पृथ्वी के आंतरिक भाग में एकत्रित हो जाते हैं तो इसका स्वरूप चमकदार और पारदर्शी हो जाता है। इसे प्राकृतिक स्फटिक भी कहा जाता है, यह क्वार्ट्ज का ही एक रूप है। सामान्य तौर पर यह अंतर्वेशों के प्रकृति के कारण लाल, नीले, हरे, पीले और बैगनी भी हो सकते हैं। ताप की अधिकता से यह रंगहीन भी हो सकते हैं।-
डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, भूगोलविद्, दमोह
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/damoh/news/white-shiny-stone-coming-out-of-farmers-bore-sent-to-lab-for-investigation-128089559.html
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