वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ाए सहायक इंजीनियर ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारी का आदेश नहीं माना। जिस बंद ट्रांसफार्मर को चालू करने के नाम पर वह रिश्वत मांग रहा था उसे चालू करने के आदेश अधीक्षण यंत्री ने जारी कर दिए थे। इसके बाद भी सहायक इंजीनियर भौतिक सत्यापन के लिए अड़ा हुआ था।
वह ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करने और बिजली छोड़ने में तमाम खामियां निकाल रहा था। सहायक इंजीनियर मोहन सिंह सिकरवार अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री स्तर के अफसरों के आदेश भी नहीं मानता था।
कोई भी एचटी कनेक्शन को वह तब तक चालू नहीं करता था जब तक उसे लोड के हिसाब से रिश्वत न मिल जाए। शिकायतकर्ता राजेंद्र राठौर के प्रकरण में अधीक्षण यंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिल गई थी। इसके बाद वह केस अटका कर बैठा था। वह लोड के हिसाब से 50 हजार रुपए की डिमांड कर रहा था।
रिश्वत लाने का दबाव बनाते हैं
विभागीय जानकारों का कहना है कि हर जोन पर इस तरह की समस्या आती है। ठेकेदार द्वारा कनेक्शन का इस्टीमेट बनाते ही सहायक इंजीनियर, कार्यपालन यंत्री स्तर के अफसर ठेकेदार को फोन लगाकर बुला लेते हैं। उनसे लोड स्वीकृत करने और बिजली सप्लाई शुरू करने के नाम पर रिश्वत लाने का दबाव बनाते हैं।
जिन मामलों में ठेकेदार तैयार नहीं होते उन मामलों में फाइल में से दस्तावेज गायब कर देते हैं। कभी एग्रीमेंट निकाल लेते हैं तो कभी रजिस्ट्री के पन्ने गायब कर देते हैं। शहर के पांचों डिविजन मुख्यालयों पर इस तरह के मामले लंबित हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/the-assistant-engineer-did-not-start-the-ht-connection-until-the-bribe-was-found-127659740.html
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