कोरोना महामारी के इस दौर में हजारों परिवारों को घर से बेघर कर दिया है। लंबी-लंबी सड़कें इन लोगों के मन में बैठ मौत के खौफ के कारण छोटी नजर आ रही है। कोई पैदल जा रहा है तो कोई साइकिल से जा रहा है। कोई ट्रक की छत पर बैठा हुआ है। जिसे जो साधन मिल रहा है घर की तरफ भाग रहा है। मुंबई, गुजरात के साथ महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों से रोजाना 700 से 800 गरीब मजदूर इलाहाबाद, मिर्जापुर, वाराणसी की तरफ जाते हुए मिल रहे हैं। न खाने की चिंता है ना शरीर की थकान इन्हें रोक पा रही है। मौत की दहशत में जान बचाना जुनून बन गया है।
इधर पिपरिया शहर में लॉकडाउन में मिली ढील के कारण बाहर के शहरों से लोगों के आने की संख्या एकाएक बढ़ गई है। पास के रुपए ख़त्म हो जाने और लॉकडाउन बढ़ने के अंदेशे के साथ भोजन नहीं मिलने से परेशान लोग घर की तरफ भाग रहे हैं। पिछले दो दिन में दो दर्जन से ज्यादा लोग पिपरिया आ चुके हैं। आलम यह है कि पिपरिया के शहरी क्षेत्र में बनाए गए दो क्वॉरेंटाइन सेंटर फुल हो चुके हैं। यहां 40 लोगों को रखा गया है। तीसरा क्वॉरेंटाइन सेंटर पिपरिया के पास ही जमाडा गांव के छात्रावास को बनाया गया है।
सिर पर सामान, चल रहे पैदल
इटारसी में पेंटिंग का काम करने वाले सुकेश अपनी पत्नी शन्नो, बेटे शालू और बेटी काजल के साथ घर का जितना सामान हो सकता था साथ लेकर पैदल अपने शहर इलाहाबाद के लिए निकल पड़े हैं। पिपरिया-बनखेड़ी रोड पर पेट्रोल पंप के सामने रात में 5:30 बजे के आसपास इस परिवार के चेहरे पर थकान के गहरे भाव थे। उन्होंने बताया कि पांच दिन पहले इटारसी से निकले हैं। छोटे बच्चे शालू को गोद में लेकर उसके वजन के कारण कमजोर कद काठी के सुकेश ज्यादा नहीं चल पाते, इसलिए बार-बार रुक कर आराम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कुछ दूरी तक अगर किसी वाहन से भिजवाने की व्यवस्था कर दें तो बड़ी कृपा होगी। मॉर्निंग वॉक पर निकले चैनसिंह और उनके साथियों ने एक हजार रुपए के आसपास राशि एकत्रित कर इन लोगों को दी और एक ट्रक वाले को रोककर दंपति को जबलपुर के लिए रवाना कर दिया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/rupees-run-out-household-men-with-children-laborers-on-foot-to-the-village-127290062.html
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