इसी काे देखते हुये दमोह सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य अनूप अवस्थी ने नया फर्नीचर खरीदने की बजाय स्कूल के पुराने फर्नीचर को नए सिरे से तैयार कराया है और वह भी नए फर्नीचर से भी मजबूत। उन्हाेंने टेंडर से खरीदी न करके, उसकी जगह पर बाजार से सामग्री खरीदी और मैकेनिक से फर्नीचर तैयार करा दिया। ऐसा करने से जो फर्नीचर उन्हें बाजार से 8 लाख रुपए में मिलना था, अब वही फर्नीचर 3 लाख रुपए में कंपलीट करा लिया है। कुछ इसी तरह का कार्य उन्होंने स्कूल की मरम्मत में किया है। करीब 5 लाख रुपए के काम को उन्होंने डेढ़ लाख रुपए में कराया है।
दरअसल स्कूल की चार क्लासों का फर्नीचर खराब हो गया था। फर्नीचर की खरीदी के लिए करीब 8 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाया गया था, इस एस्टीमेट को मंजूर कराने में भी समय लग रहा था और बजट अधिक होने की वजह से भी देरी लग रही थी। इस स्थिति को देखते हुए प्राचार्य ने स्कूल के बजट से ही काम कराने का निर्णय लिया। उन्हाेंने चार क्लासों के लिए फर्नीचर तैयार करने के लिए मैकेनिक लगाए और उन्हें बाजार से सामान दिलाया। जिससे मैकेनिकों ने करीब 33 डबल बैंच, 50 सिंगल बैंच और कुछ कॉमन बैंच स्कूल के लिए अलग से बनाईं। इस तरह करीब 3 लाख रुपए की राशि खर्च होने पर स्कूल की चार कक्षाओं का फर्नीचर तैयार हो गया। क्वालिटी की देखरेख स्वयं की और फर्नीचर की मजबूती का भी ध्यान रखा प्राचार्य द्वारा रखा गया। प्राचार्य अवस्थी ने बताया कि फर्नीचर की समस्या लंबे समय से चली आ रही थी, प्रक्रिया में भी समय लग रहा था, इसलिए उन्होंने यह रास्ता निकाला। ऐसा होने से करीब 5 लाख रुपए की बचत के साथ फर्नीचर भी मजबूत बन गया।
इसी तरह उन्होंने बताया कि स्कूल की मरम्मत के लिए भी 5 लाख रुपए से ज्यादा का एस्टीमेट बन रहा था, लेकिन यह काम भी मरम्मत कराने से डेढ़ लाख रुपए में हो गया है। यदि शासकीय एजेंसी से फर्नीचर की खरीदी की जाती और सीपीडब्ल्यूडी से मरम्मत कराई जाती तो ज्यादा राशि खर्च होती।
दमोह। नए फर्नीचर पर बैठे िवद्यार्थी। इनसेट : प्राचार्य अवस्थी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/damoh/news/mp-news-principal-of-central-school-instead-of-buying-new-furniture-built-the-old-one-saving-five-lakh-rupees-062552-6247443.html
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