Thursday, December 26, 2019

मांडू उत्सव की पहली शाम बाग की कलाकृति पर आधारित मौन नाटक 'शक्ति को उजागर करने का संकल्प' होगा

मांडू.मांडू उत्सव की पहली शाम बाग की कलाकृति पर आधारित मौन नाटक 'शक्ति को उजागर करने का संकल्प' होगा। मप्र पर्यटन विभाग द्वारा 10 मिनट के आयोजित इस नाटक में 25 कलाकार आदिवासी बाग प्रिंट की ड्रेस में दिखाई देंगे। इसमें दिखाया जाएगा कि किस प्रकार से बाग के कलाकार अपनी जीवनशैली में इन कलाकृतियों को आकर्षक बनाते है। एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी और आज तीसरी पीढ़ी के लोग काम कर चरखे पर यह कलाकृति बना रहे।

यह नाटक एक परिवार पर आधारित है। इसमें एक घर में दादा-दादी, माता-पिता बाग की कला को बनाते है। उसी बीच एक लड़की स्कूल से अपने घर पर आती है। वह बस्ता रखती है कि पिता उसे आवाज देता है कि चल आजा काम पर लग जा। यह कलाकृति कर। लड़की थोड़ी देर सुनती रहती है फिर वह अपने पिता की बात सुनकर उनके सामने खड़ी होकर कहती है चरखे से नहीं मैं कॉमर्स और आर्ट से बाग की कला को देश और विदेश में प्रख्यात करूंगी। मेरा सपना बाग की दुनिया को बड़े स्वरूप में ले जाने का है। मैं बाग की बेटी हूं। मैं चरखा नहीं चला पाऊंगी। मैं कुछ वह नया करूंगी जो दुनिया देखेगी। बेंगलुरु से नहीं आएगा इसका कलर। मैं स्वयं शासन से मदद मांग कर यह कलर अपने प्रदेश में बनाऊंगी और इस कला को आकर्षक बनाऊंगी। रेशमी कीड़ा से ही बनाएंगे कलर।

हेरिटेज वाॅक, संगोष्ठी व कार्यशाला के रंग दिखने लगे मांडू में
मांडू महोत्सव में हेरिटेज वॉक और संगोष्ठी एवं कार्यशाला के रंग दिखा रहे कलाकार अपनी कला को यहां लाकर दिखाएंगे। नातू फाउंडेशन विगत 4 वर्षों से मांडव की ऐतिहासिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। इस अंतर्गत हेरिटेज वॉक, संगोष्ठी एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया है। नए वर्ष 2020 में नातू फाउंडेशन मांडू की विरासत के साथ साथ मांडू पर्यावरण पर भी कार्य करेगी। इसके अंतर्गत नाथू फाउंडेशन, मांडू घाटी में मिलने वाली दुर्लभ वनस्पतियों का महत्व जनमानस तक पहुंचने के लिए कार्य करेगी। इस अंतर्गत दुर्लभ वन वृक्षों की नर्सरी तैयार कर उन्हें घाटी में पुनः स्थापित करने के लिए जन एवं शासन सहयोग से पौधारोपण कार्यक्रम चलाएगी। नातू फाउंडेशन कला परिसर में इन वृक्षों के पर्यावरण एवं औषधीय गुणों की प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी आयोजित करेगा। वैसे ही आदिवासी लोक कला के प्रोत्साहन के लिए कला परिसर में पॉटरी वर्कशॉप स्थापित की जाएंगी। जहां इस कला को नए आयामों के साथ प्रदर्शित एवं विकसित किया जाएगा। जो आदिवासी कला को रोजगार उन्मुख बनाएगी।

कृष्णा बना रही है आदिवासी संस्कृति की कलाकृतियां
कट्ठीवाड़ा आदिवासी संस्कृति के घोड़े, हाथी, भगवान की कलाकृति कृष्णा भाबर बना रही है। इन्हें मांडू उत्सव में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाएंगे। मांडू उत्सव में आर्ट आॅफ गैलरी में ये कलाकृतियां रखी जाएंगी।



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मांडू. बाग प्रिंट के तहत इस प्रकार से कपड़ों पर बनाते है आकृति।
कलाकृतियां बनाते हुए कृष्णा भाबर।


source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/the-first-evening-of-the-mandu-festival-will-be-the-silent-drama-resolve-to-unleash-shakti-based-on-baghs-artwork-126392574.html

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