कथा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होते ही पंडाल आनंदमय हो गए। उन्होंने कथा में बताया कि जन्म के समय जेल के ताले खुल गए, सभी पहरेदार नींद में चले गए। वासुदेव व देवकी की बेड़ियां टूट गईं और बंधन मुक्त हो गईं। भगवान को वासुदेव ने यमुना पार करके गोकुल नंद बाबा के छोड़ आए। जहां पर बाबा के घर आनंद मंगल गीत बधाई होने लगीं। कथा में संगीतमयी भजनों में महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। कथावाचक ने कहा कि कंस ने वासुदेव के हाथों से कन्या स्वरूपी देवी को जमीन पर मारना चाहा तो वह कंस के हाथों से छूटकर आकाश में चलीं गईं। देवी रूप धारण कर बोली कंस मुझे मारने से क्या लाभ तेरा शत्रु तो गोकुल में पहुंच चुका है। यह दृश्य देखकर कंस हतप्रभ, व्याकुल हो गया। कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजे, लेकिन कृष्ण ने अपनी अलौकिक माया से दैत्यों को मारा। इसके अलावा अन्य भगवान की लीलाओं का वर्णन किया। कथा में मुख्य यजमान गिरजा शर्मा, लखन रामकिशन निर्मल, आशीष सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु ने कथा का रसपान किया।
हटा। कथा का वाचन करते कथाचार्य।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/mp/damoh/news/mp-news-happiness-and-sorrow-come-from-human-actions-only-shastri-084619-6067523.html
No comments:
Post a Comment