भोपाल .ग्राम परवाखेड़ा में अल्ट्राटेक और एसीसी जैसी नामी कंपनियों के ब्रांड नेम का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे नकली सीमेंट से और भी कई सरकारी निर्माण हुए हैं। ग्राम राताताल में इसी सीमेंट से 100 मीटर सीसी रोड का निर्माण किया गया है। ग्राम पंचायत खजूरी ने आरईएस की तकनीकी स्वीकृति पर एक लाख 38 हजार रुपए खर्च किए गए। ग्राम सरपंच विनय अहिरवार ने क्राइम ब्रांच को पूछताछ में बताया है कि फैक्टरी संचालक कदीर ने उसे असल कीमत से 30 रुपए कम में सीमेंट बोरी दी थी। कहा था कि कंपनी में पहचान होने के कारण उसे ये सीमेंट कम दाम में मिल जाती है।
गांव में निर्माणकार्य कर रहे कर्मचारियों ने खुलासा किया कि सरपंच विनय अहिरवार कदीर की फैक्टरी से ही सीमेंट खरीदते थे। उन्होंने अपनी पंचायत क्षेत्र में इसके पूर्व में भी सीसी रोड, किचन शेड, सामुदायिक भवन जैसे निर्माण करवाए हैं। क्राइम ब्रांच के खुलासे के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सतीश कुमार एस ने इस गड़बड़ी की जांच के आदेश जनपद सीईओ को दिए हैं।
हरियाणा के झज्झर व राजस्थान के शंभुपुरा में बनाई जाती है सीमेंट
सोमवार को क्राइम ब्रांच ने अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के टेक्निकल ऑफिसर और सेल्स मैनेजर से जब्त किए गए सीमेंट की जांच करवाई। सीमेंट तो अमानक निकला ही, साथ ही जिन बोरियों में सीमेंट भरा गया था, वह भी हरियाणा के झज्झर और राजस्थान के शंभुपुरा में बनाई जाती हैं। सीमेंट की ये ब्रांड केवल इन्हीं जगहों पर बनाई जाती हैं। कदीर की फैक्टरी से भोपाल, सीहोर और विदिशा में सीमेंट सप्लाई का पता पुलिस को चला है।
देखिए...राताताल में नकली सीमेंट से ऐसे बन गई रोड...यह अभी से ही जर्जर दिखने लगी है
सीसी रोड या अन्य सरकारी निर्माण के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित कर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को भेजा जाता है। इसके बाद मौके की जांच कर इंजीनियर इस्टीमेट तैयार करता है और इसकी प्रशासकीय स्वीकृति ग्राम पंचायत जारी करती है, जबकि तकनीकी स्वीकृति जारी करने की जिम्मेदारी आरईएस को है। समय-समय पर इंजीनियर निर्माण कार्यों की जांच करते हैं, लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं। ग्राम पंचायत खजूरी के पंच अशोक यादव का कहना है कि सरपंच अपनी मर्जी से काम करते हैं। ग्राम पंचायत के सदस्यों से चर्चा नहीं करते हैं।
10 दिन में बदल देता था मजदूर
डीएसपी क्राइम ब्रांच सलीम खान ने बताया कि कदीर को फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया जा पाया है। उसके पकड़े जाने के बाद ही खुलासा होगा कि उसने सीमेंट की सप्लाई और कितने सरकारी निर्माण के लिए की है। वह हर 8-10 दिन के भीतर अपने मजदूरों को बदल देता था ताकि उसकी गड़बड़ी बाहर न आ सके। पुलिस ने अब तक दस लाख रुपए से ज्यादा का माल फैक्टरी से जब्त किया है।
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/sarpanch-received-fake-cement-for-30-rupees-less-price-made-cc-road-and-building-from-the-same-126664117.html
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