वाहनों का मेंटेनेंस और संचालन करने वाली नगर निगम की कर्मशाला फिलहाल बंटाधार हो रही है। 86 कचरा कलेक्शन वाहन में से 38 खराब पड़े हैं। इससे शहर का 23 से 25 प्रतिशत कचरा नहीं उठ पा रहा है। इतना ही नहीं कलेक्शन गाड़ियों के कचरे को कचरा स्टेशन से जुलवानियां ट्रेंचिंग ग्राउंड तक ले जाने वाले दोनों कॉम्पेक्टर भी खराब हैं। इसके अलावा 5 में से 2 फायर लॉरी और तीन में से एक डंपर भी खराब है।
सफाई को बेहतर बनाने के लिए शहर में घूम रहे कमिश्नर सोमनाथ झारिया ने शिकायतों के बाद सहायक उपयंत्री चंद्रकांत शुक्ला को प्रभारी कर्मशाला अधीक्षक के पद से हटा दिया है। शनिवार शाम उपायुक्त विकास सोलंकी ने आदेश जारी किए हैं। इसमें शुक्ला की जगह प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी एमके जैन को कर्मशाला की कमान सौंपी गई है।
सुधारने के एस्टीमेट में भी बड़ा खेल
खराब पड़े कचरा कलेक्शन वाहनों सुधारने के लिए कर्मशाला इंजीनियर और प्रभारी अधीक्षक द्वारा लगाए गए एस्टीमेट में भी बड़ा खेल होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि अनेक गाड़ियां 10 से 15 हजार के खर्च में सुधर सकती हैं। बावजूद कर्मशाला से चली फाइलों में 50 से 70 हजार रुपए तक के एस्टीमेट लगा दिए गए हैं। मंजूरी करने वाले अफसर भी एस्टीमेट देखकर हैरत में रह गए। फिलहाल वे गाड़ियों की खराब और एस्टीमेट को क्राॅसचेक कर रहे हैं। इसमें गड़बड़ी मिली तो प्रभारी अधीक्षक के बाद इंजीनियर पर भी कार्रवाई हो सकती है।
गाड़ियों के हाल-बेहाल, मेंटेनेंस के लिए बना दिए महंगे एस्टीमेट
कचरा कलेक्शन- 30 और 56 पुराने सहित डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बेड़े में 86 वाहन हैं। वर्तमान में इसमें से 38 खराब पड़े हैं। इनमें दो नए जबकि बाकी पुराने हैं। बताया जा रहा है कि कर्मशाला इंजीनियर द्वारा छोटे से काम के लिए भारी-भरकम एस्टीमेंट बना दिए हैं, जिसके चलते अधिकारियों ने फिलहाल जांच के लिए फाइल रोक दी है।
प्रभाव- शहर से लगभग 19 टन कचरा रोजाना कम उठने लगा है। इससे कचरा स्थलों पर फिर कचरा दिखाई देने लगा है। शहर से रोजाना 82 से 85 टन कचरा उठता है।
फायर लॉरी-5 गाड़ियाें में से दो खराब है। एक का पाइप फटा है। दूसरी की बैटरी डिस्चार्ज हो गई थी। खर्चा 150 रुपए का था। इंजीनियर सिद्धार्थ सोनी ने ड्राइवर को 100 रुपए पकड़ा कर चार्ज कराने को कहा। इस पर अफसरों ने इंजीनियर को लपकाया तो शनिवार सुबह इंजीनियर ने अपनी चिढ़ ड्राइवर पर निकाली। इससे सारे ड्राइवर नाराज हो गए हैं।
प्रभाव-कोविड-19 व अन्य कार्य का बोझ तीन फायर लॉरियों पर आ गया है। सफाई और कंटेनमेंट एरिया में छिड़काव भी नहीं हो पा रहा है। शनिवार को एक फायर लॉरी सुधर गई थी।
कॉपेक्टर- दोनों खराब, एक दो माह से जबकि 7 सितंबर से कर्मशाला परिसर में खड़ा है। इनकी जिम्मेदारी अमृत सागर बगीचे और विरियाखेड़ी वाले कचरा स्टेशन से कलेक्शन गाड़ियों का कचरा लेकर उसे जुलवानिया ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाने की हैं। दोनों के बंद होने से अब कलेक्शन गाड़ियों को कचरा खाली करने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाना पड़ रहा है।
प्रभाव- ट्रेंचिंग ग्राउंड तक का चक्कर लगाने से कलेक्शन गाड़ियां वार्डों में से कम कचरा उठा पा रही है। रोजाना 50 से 55 लीटर डीजल अतिरिक्त खप रहा है।
सक्शन कम जैटिंग मशीन-खासतौर पर सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मार्च में नगर निगम ने 38 लाख में खरीदा था। इसके बाद लगे लॉकडाउन में मशीन ने जैटिंग तो बहुत की लेकिन सितंबर में मूल काम सक्शन की बुकिंग ली तो तीन-चार बार के बाद सक्शन ने काम करना ही बंद कर दिया। कंपनी मैकेनिक ने चेक भी किया लेकिन ठीक नहीं हो पाई।
प्रभाव- निगम को हर माह 12 से 15 हजार का नुकसान हो रहा है। मशीन का किराया 1500 रुपए है। सामान्यत: निगम को हर माह 18 से 20 बुकिंग मिलती थी, लेकिन मशीन 10 से 12 ही साफ कर पाती थी। अब वह भी बंद।
^ट्रांसफर होकर आए हैं। शहर नया होने से मेंटेनेंस कराने में परेशानी आ रही थी इसलिए चंद्रकांत शुक्ला की जगह एमके जैन को प्रभारी कर्मशाला अधीक्षक बनाया गया है। वाहनों को सुधारने की कार्रवाई भी चल रही है। विकास सोलंकी, उपायुक्त-नगर निगम
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/38-out-of-86-garbage-collection-vehicles-malfunctioned-superintendent-in-charge-removed-127778898.html
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