शहर की दोनों मंडियों छावनी और लक्ष्मीबाई नगर अनाज मंडी में 25 सितंबर से शुरू हुई मंडी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का 9वां दिन भी पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक सरकार ने कर्मचारियों की लंबित मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया है।
किसान भी मंडी बंद होने से परेशान हो रहे हैं। अभी तक की हड़ताल में केवल दोनों मंडियों से ही तकरीबन 63 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है। दोनों मंडी में कुल मिलाकर प्रतिदिन लगभग 7 लाख रुपए के राजस्व की आय होती हैै।
सोयाबीन की फसल का सीजन शुरू हो चुका है। भारी बारिश से फसल खराब होने के बावजूद आवक अच्छी बताई जा रही है। जब तक आवक शुरू हो पाती उससे पहले ही मंडी के कर्मचारियों व अफसरों ने हड़ताल कर दी। ऐसे में सोयाबीन जहां किसानों के खेतों में खड़ी है तो कुछ ने घरों व गोदाम में रखी हुई है।
वे सभी किसान मंडी के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं संयुक्त संघर्ष मोर्चा मंडी बोर्ड भोपाल के आह्वान पर प्रदेश के सभी मंडी कर्मचारी मॉडल एक्ट का विरोध कर रहे हैं। सरकार की इस उदासीनता से मंडी बोर्ड को प्रदेश के कई जिलों की मंडियों के बंद होने से करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है।
अभी तक सरकार ने एमएसपी को कानूनी दर्जा नहीं दिया है, जबकि मंडियों में किसान को एमएसपी मिलने की गारंटी पहले के कानून में थी। अब मंडी एक्ट का कानून ही बदल दिया गया और बाहरी व्यापारियों को उपज की खरीदी कहीं पर भी करने पर कहीं टैक्स नहीं देना होगा। इधर, मंडियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के समाप्त होने को लेकर मंडी के कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने हमारी जिन मांगों को माना था वह लिखित में आदेश जारी कर दें।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/strike-for-a-week-in-grain-mandi-loss-of-rs-63-lakh-revenue-127778912.html
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