Tuesday, October 6, 2020

दवाइयों का 69% कच्चा माल आता है चीन से, हजार एकड़ का एपीआई हब बनाएगा आत्मनिर्भर

(संजय गुप्ता) पीथमपुर का सेज-2 करीब 500 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है। दवाइयों में इस्तेमाल कच्चा माल यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इन्ग्रेडियंट (एपीआई) का क्लस्टर यहां बनाने के लिए प्रदेश सरकार इसी महीने केंद्र सरकार काे प्रस्ताव भेजेगी। बस कुछ ठीक रहा ताे यहां एक हजार एकड़ में एपीआई हब भी आकार लेगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

पीथमपुर सेज-2 से वर्ष 2019-20 के दौरान 6799 करोड़ रुपए से ज्यादा की दवाएं निर्यात की गईं। यहां देश-विदेश की नामी मल्टीनेशनल फार्मा कंपनियों के प्लांट हैं। कुछ (पार फार्मा, मैकलाएड फार्मा आदि) के लगातार बन रहे हैं। देश की नं.2 फार्मा कंपनी ल्युपिन ने एक प्लांट से काम शुरू किया था और अब वह तीसरा स्थापित कर रही है। मायलान, पार जैसी अमेरिकी कंपनियां भी हैं। इन सभी ने पांच हजार करोड़ का निवेश किया हुआ है और इनमें 13 हजार 671 लोग काम कर रहे हैं।

6 करोड़ से 3 हजार करोड़ रुपए टर्नओवर वाली कंपनियां यहां

इतना जरूरी : केंद्र ने ही मांगा प्रस्ताव, देगा एक हजार करोड़ रु. की सब्सिडी
देश में एपीआई 69 फीसदी चाइना से आता है। यानी, दवा बनाने के लिए हम पूरी तरह से चाइना पर निर्भर है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने विभिन्न सरकारों से एपीआई क्लस्टर बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। इसके लिए मप्र सरकार ने मोहसा और पीथमपुर सेज-2 को चिह्नित किया है। यहां एक हजार एकड़ जमीन पर यह क्लस्टर बनेगा और इसमें केंद्र सरकार एक हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी देगी, जिससे एपीआई प्लांट से निकलने वाले हानिकारक केमिकल का ट्रीटमेंट और अन्य आधारभूत ढांचे का विकास होगा। यहां बनने वाले एपीआई को पूरे देश में भेजा जाएगा।

इतना महत्वपूर्ण : इंसुलिन और अन्य हार्मोन से लेकर एड्स की दवाएं बनती हैं
1. फार्मा जोन में इंसुलिन जैसी हार्मोनल दवाएं बनाने का सबसे बडा गढ़ है। इसके साथ ही खाली कैप्सूल का उत्पादन हाेता है, जो फार्मा कंपनियों के दवाएं बनाने के काम आते हैं। ऑर्गन ट्रांसप्लांट के समय बॉडी में इम्युन पॉवर कम करने की दवा भी यहीं बनती है। इसके साथ ही भारी मात्रा में आई ड्राॅप बनता है। एक कंपनी एपीआई भी बनाती है।

2. मैकलायड ने 89 करोड़ रुपए से प्लांट लगा लिया है और यहां 380 लोगों को रोजगार मिला है। निर्यात की शुरुआत हो रही है। पार फार्मा ने भी 200 करोड़ के निवेश से प्लांट लगाना शुरू कर दिया है। देवास स्थित रैनबैक्सी को देश की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी सन फार्मा ने टेकओवर कर लिया है, जिसका 1230 रुपए करोड़ का निर्यात है। यहां 1700 लोग काम करते हैं। इसके साथ ही एल्केम भी 150 करोड़ का निवेश कर प्लांट लगा रही है, जिसमें 137 लोग काम कर रहे हैं।



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69% of the raw material comes from China, thousands of acres of API hub will be self-sufficient


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/69-of-the-raw-material-comes-from-china-thousands-of-acres-of-api-hub-will-be-self-sufficient-127787708.html

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