कोविड के गंभीर मरीजों के लिए बुरी खबर है। निजी अस्पतालों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कोविड मरीजों की भर्ती बंद कर दी है। एक अस्पताल के संचालक ने तो बाकायदा सोशल मीडिया पर कह दिया है कि वो अब कोविड मरीज नहीं लेंगे। वहीं बाकी प्रमुख निजी अस्पताल बेड नहीं होने की बात कहकर मरीज को भर्ती नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर मेडिकल में मरीजों का ओव्हरलोड है और सुखसागर में प्रशासन ने केवल मॉडरेट मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था की है। प्रश्न ये है कि गंभीर मरीज जाएँ कहाँ?
हालात आशंका से कहीं ज्यादा खतरनाक, मरीज और परिजन परेशान
दैनिक भास्कर को शुक्रवार को कई मरीजों ने बताया कि उन्हें निजी अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया है। एक व्यवसायी साँस फूलने की शिकायत पर एक मझोले निजी अस्पताल में भर्ती हुआ, बाद में टेस्ट पॉजिटिव आया तो सभी बड़े निजी अस्पतालों ने बेड न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया। एक मल्टीनेशनल कंपनी के बड़े अफसर के पिता को भी सभी निजी अस्पतालाें ने एडमिट करने से इनकार कर दिया। हार्ट पेशेंट होने के कारण उन्हें अम्ब्रेला हॉस्पिटल की जरूरत है, जबकि वो बिना कार्डियक फैसिलिटी वाले अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। एक अधिकारी तो स्वयं ही एक निजी हॉस्पिटल पहुँचे, लेकिन जब उन्हें बेड नहीं मिला तो मेडिकल की ओर रुख किया।
आखिर क्या है वजह }निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों से लिए जा रहे रेट को लेकर चल रहे प्रचार-प्रसार पर कलेक्टर ने नर्सिंग होम एसोसिएशन और निजी अस्पतालों के संचालकों के साथ बैठक की थी। कहा जा रहा है कि निजी अस्पताल के संचालक राजी नहीं हैं कि रेट घटाए जाएँ या प्रशासन डॉक्टर्स द्वारा ली जा रही फीस के संबंध में कोई हस्तक्षेप करे। इसी कारण दबाव बनाने उन्होंने पेशेंट एडमिट करना बंद कर दिया है। एक अस्पताल के संचालक ने तो सोशल मीडिया पर कह दिया है कि उन पर मरीजों से उगाही का आरोप लग रहा है और कोविड का इलाज बेहद महँगा है, जिसके बीच समन्वय न बना पाने से वो इलाज बंद कर रहे हैं।
ये हैं मेडिकल और दूसरी सरकारी व्यवस्थाएँ }सरकारी स्तर पर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के कोविड वार्ड को मिलाकर 537 बेड क्षमता है, जिनमें वर्तमान में 189 मरीज भर्ती हैं। यहाँ गंभीर मरीजों को सुपर स्पेशिएलिटी में उपचार दिया जा रहा है। 70 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। जिला अस्पताल विक्टोरिया में 66 बेड की क्षमता में कम लक्षण वाले 24 मरीज भर्ती हैं। सुखसागर कोविड केयर सेंटर में बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए 250 बेड की क्षमता है जिनमें 93 मरीज भर्ती हैं। इसी प्रकार ज्ञानोदय हॉस्टल में 260 बेड हैं जिनमें 30 मरीज भर्ती हैं। सेंट्रल जेल के आइसोलेशन सेंटर में 70 की क्षमता में 57, रेलवे हॉस्पिटल में 70 बेड हैं जहाँ 10 पॉजिटिव मरीज हैं। इनके अलावा सेना अस्पताल में 250 बेड हैं जहाँ 19 मरीज भर्ती हैं। शासकीय व्यवस्था वाले 1503 की क्षमता में 422 मरीज भर्ती हैं। निजी अस्पतालों में 428 क्षमता में 174 मरीज इलाजरत हैं, जबकि 420 संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं।

डॉक्टर-स्टाफ थक गए हैं, प्रशासन से रेट निर्धारण भी नहीं है, नए मरीज नहीं ले रहे।
-सौरभ बडेरिया, मेट्रो अस्पताल
जो मरीज हैं उनका इलाज ही कर रहे, नए कोविड पॉजिटिव नहीं ले रहे, कई परेशानियाँ हैं।
-सरबजीत सिंह मोखा, सिटी हॉस्पिटल
हमारे पास कोरोना आईसीयू नहीं है, इसलिए सामान्य कोविड मरीज ले रहे हैं।
-प्रकाश धीरावाणी, जबलपुर अस्पताल
कोविड मरीज नहीं ले रहे, कई स्टाफ संक्रमित हुआ है, उनके ठीक होने पर रिव्यू करेंगे।
-डॉ. अनिल अरोरा, महाकौशल अस्पताल
हमारे यहाँ कोविड मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, अभी 12 मरीज भर्ती हैं।
-डॉ. राजबली सिंघई, बॉम्बे हॉस्पिटल
हम गंभीर मरीजों को छोड़कर कोविड के सामान्य मरीजों को ही भर्ती कर रहे हैं।
-आशीष रंजन, शैल्बी हॉस्पिटल
हमारे यहाँ कोविड के नए मरीज लिए जा रहे, कुछ स्टाफ के पॉजिटिव होने से परेशानी तो है।
-डॉ. संजय नागराज मार्बल सिटी हॉस्पिटल
हमारे सभी 30 बिस्तर भरे हैं, उनके खाली होने पर ही नए मरीज लिए जा सकेेंगे।
-केके साहू, स्वास्तिक अस्पताल
हमेें असिम्टोमेटिक मरीजों को रखने की परमीशन है, ऐसे मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
-डाॅ. एमपी गुप्ता, आशीष हॉस्पिटल
बेड की उपलब्धता को देखते हुए कोविड के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
-डॉ. विवेक दीवान, मेडिसिटी हाॅस्पिटल
बेड उपलब्ध होने पर मरीज को भर्ती कर रहे हैं, एचएफएन की उपलब्धता भी देखते हैं।
-डॉ. आशीष टंडन, आदित्य हॉस्पिटल
हम कोरोना के मरीज नहीं ले रहे हैं, भर्ती मरीज पॉजिटिव होता है तो उसका इलाज करते हैं।
-डॉ. अजय भंडारी, भंडारी अस्पताल
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/doors-of-private-hospitals-closed-medical-already-full-moderate-patient-in-sukhsagar-where-to-go-seriously-ill-127687213.html
No comments:
Post a Comment