अंशुल वाजपेयी, कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप के चलते अब लोग पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं। स्थिति यह है कि जिन लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ रही हैं, वे अब एंटीबाॅडी टेस्ट के माध्यम से इस तथ्य की पुष्टि करना चाह रहे हैं कि कहीं उन्हें भी कोरोना संक्रमण ने अपनी चपेट में तो नहीं लिया था। विशेषज्ञों के अनुसार वायरल लोड कम होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के कारण कई लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं आते या बहुत ही मामूली लक्षण देखने को मिलते हैं। इस कारण आरटी-पीसीआर समेत अन्य टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव आती है। शहर की निजी लैब में यह टेस्ट किया जा रहा है। मुख्यरूप से मेडिकल सेवाओं से संबंधित लोग ही इस टेस्ट को करा रहे हैं।
ग्वालियर के निजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे एक डाॅक्टर ने 3 बार काेराेना का टेस्ट कराया, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई। चूंकि वह लंबे समय से इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे हैं और ऐसे समय में आने वाले मरीज को तुरंत उपचार देना होता है और बाद में कोरोना का टेस्ट कराया जाता है। संक्रमित होने की संभावना के चलते डाॅक्टर ने जुलाई के तीसरे सप्ताह में चौथी बार भी टेस्ट कराया, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके कुछ दिन बाद जब उन्हें एंटीबाॅडी टेस्ट के बारे में पता चला तो उन्होंने ब्लड सैंपल देकर जांच कराई। इस टेस्ट में रिपोर्ट पाॅजिटिव आई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि डाॅक्टर को संक्रमण ने चपेट में लिया था, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के कारण संक्रमण के लक्षण उभरकर सामने नहीं आए।
आठ लाेगाें ने कराया टेस्ट
कुछ दिन पहले ही हमारी लैब ने एंटी बाॅडी टेस्ट शुरू किया है। अभी तक अाठ लाेगाें ने ये टेस्ट कराया है। इसमें एक शख्स में एंटी बाॅडी मिली है। हमारे यहां 1500 रुपए में ये टेस्ट किया जा रहा है।
-नरेंद्र सिंह, डाॅ. लाल पैथाेलाॅजी
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/corona-came-and-was-not-detected-neither-fever-nor-other-symptoms-were-seen-but-antibodies-formed-in-the-body-127606762.html
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