इस बार रक्षाबंधन पर काेराेना का भी बंधन है। इसके कारण त्याेहार में खलल पड़ा है। कहीं परिवहन के साधन नहीं हाेने से ताे कहीं लाॅकडाउन के कारण परेशानी खड़ी हुई।
एेसा एक मामला बागली का है। भाेपाल में टाेटल लाॅकडाउन है। इसकी वजह से 20 साल में पहली बार एक बड़ी बहन अपने भाइयाें काे राखी बांधने बागली नहीं आ सकी। इतना ही नहीं उनका बेटा भी बागली में ही है। अब मामा और भांजे दाेनाें की कलाई सुनी रह जाएगी। बागली निवासी अध्यापक वीरेंद्रपालसिंह सेंगर की इकलौती बड़ी बहन रजनी भोपाल में रहती हैं। भाेपाल में लगे लाॅकडाउन की वजह से वे नहीं अा पाईं। उनकी बेटी ज्याेत्सना भाेपाल में ही है। जबकि बेटा पुष्पराज अपने मामा के यहां बागली में है। उसे भी ज्याेत्सना राखी नहीं बांध पाएंगी। मामा वीरेंद्रपालसिंह और भांजे पुष्पराज की कलाई सुनी ही रह जाएगी। सेंगर ने बताया कि कभी सोचा नहीं था कि ऐसा दिन भी आएगा। बहन रजनी ने बताया वीडियो कॉलिंग के माध्यम से मैं और मेरी बेटी राखी मनाएंगे।
95 किमी का सफर कर बागली पहुंची बहन
उज्जैन में रहने वाली लीना पाेरवाल रक्षाबंधन पर उज्जैन से चापड़ा तक बस से अाती थी। इस बार काेराेना महामारी के चलते यात्री बसें बंद हैं। लीना ने बताया कि भाइयाें काे राखी बांधने के लिए उज्जैन से 2200 रुपए में एक टैक्सी की। उज्जैन से बागली तक करीब 95 किलाेमीटर का सफर तय कर बागली पहुंचीं। फिर भी काेराेना के डर से भाइयाें, भाभियाें अाैर बच्चाें के लिए कपड़े अाैर मिठाई नहीं ला सकी। इसके चलते घर पर ही मिठाई बनाई गई है।
देवास बायपास से लाेग निजी वाहनाें से रक्षाबंधन के लिए हुए मिले। सबसे ज्यादा बाइक पर। पूरा परिवार और बेग लेकर जैसे-तैसे लाेगाें ने सफर किया। इंदौर से आष्टा बाइक से अपने परिवार को लेकर जा रहे पूरनसिंह पवार ने बताया मैं इंदौर में निजी कंपनी में कार्य करता हूं। बसें नहीं चल रही है ताे पत्नी और दो बच्चों के साथ बाइक से अाष्टा जा रहा हूं। खाना पानी लेकर चले हैं। देवास के प्रदीप साहू काे सागर के ईशरवारा जाना था। बस नहीं मिली ताे कार वाले से पूछा, उसने किराया 5 हजार रु. बताया। ज्यादा खर्च देख वे अपनी पत्नी के साथ बाइक से ही 111 किमी के सफर पर चल दिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/dewas/news/locked-in-bhaepal-so-rakhi-tying-could-not-come-to-bagli-sister-127579941.html
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