Saturday, March 21, 2020

जल ने बदला कल, गेहूं उत्पादन में हरदा प्रदेश में दूसरे नंबर पर


हर दशक बढ़ता गया सिंचाई का रकबा


1980 से 1982 के बीच तवा बांध से नहर के जरिए सिंचाई शुरू हुई। 80-81 में 986 हेक्टेयर में सिंचाई हुई। अगले साल यह रकबा 3 गुना बढ़ा। 1982-83 में रकबा 6533 हे. हुअा। 1989 से 90 के बीच 39975 हे., 1990-91 में 42390 हे., अगले साल 14 हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ा। 1999 से 2000 तक 68588 हे., 2005-06 में यह 75 हजार हेक्टे., 2015-16 में 1 लाख 1 हजार 114 हे. काे छू गया। 2018-19 में 1 लाख 4 हजार 868 हेक्टे. में सिंचाई हुई।

महेश भवरे| हरदा

जल है ताे कल है यह नारा एेसा ही नहीं बना हाेगा। इसमें हमारे अाने वाला कल, हमारे सुनहरे सपने, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सब कुछ छिपा है। तवा डैम बनने अाैार जिले काे पानी मिलने से किसानों की तकदीर बदल दी। बदलाव का रंग खुशियाें अाैर क्षेत्र की समृद्धि के रूप में उनके चेहराें अाैर रहन सहन पर साफ देखा जा सकता है।

गेहूं उत्पादन में हरदा जिला प्रदेश में दूसरे नंबर पर है, वहीं संभाग मुख्यालय का होशंगाबाद प्रदेश में अव्वल है। गेहूं, चना, सोयाबीन के बंपर उत्पादन से बाजार में अर्थव्यवस्था सुधरी। काम धंधे बढ़े ताे मजदूर वर्ग के चेहरों पर भी खुशियां अाईं। साल दर साल सिंचाई का रकबा बढ़ा।

गेहूं, चना, सोयाबीन की नई वैरायटियों अाईं। उन्नत तकनीक व आधुनिक उपकरण अाैर खाद, कीटनाशक अा गया। इनसे तेजी से प्रति एकड़ हर उपज की पैदावार का ग्राफ बढ़ाया। 1990 से 2000 के बीच हर पांचवें किसान के पास ट्रैक्टर अा गया। 2010 के बाद नए बीज व खाद व कीटनाशक से पैदावार इस कदर बढ़ी कि पंजाब से गेहूं कटाई के लिए अाने वाले हार्वेस्टरों काे ही खुद जिले के किसान खरीदकर मालिक बन गए। अब दूसरे प्रांतों से हार्वेस्टर नाम मात्र के अाते हैं।

तवा डैम के पानी मिलने बढ़ा सिंचाई का रकबा अाैर पैदावार

जिले की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। बिना पानी खेती की कल्पना संभव नहीं है। 1970 से 80 के बीच तक की खेती माैसम आधारित थी। जिस सीजन में 2-3 बार मावठा गिरता था, तब गेहूं की पैदावार 7-8 क्विंटल प्रति एकड़ हाेती थी। तवा डैम बनने से नहराें से पानी मिलना शुरू हुअा। इससे सिंचाई का रकबा बढ़ा। बीज की नई वैरायटियों अाईं। 1980-90 के दशक में गेहूं 12 बाेरे एकड़ पैदा हाेता था, अाज वहां 20 बाेरे एकड़ पैदावार है। चना 12 बाेरे एकड़ हाे रहा है।

इस तरह बढ़ी पैदावार

1980 से 85 तक- 9 क्विंटल प्रति एकड़, 1985 से 90- 12 क्विंटल, 1990 से 2000- 16 क्विंटल, 2000-10-18 क्विंटल, 2010-19- 20 क्विंटल प्रति एकड़।

सिंचाई के साधन बढ़े


-एमपीएस चंद्रावत, उप संचालक,

हरदा। डैम का पानी मिलने कारण इस तरह लहलहा रहे हैं गेहूं के खेत।



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Harda News - mp news water changed yesterday harda in wheat production is second in the state


source https://www.bhaskar.com/mp/harda/news/mp-news-water-changed-yesterday-harda-in-wheat-production-is-second-in-the-state-071548-6893277.html

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