भोपाल.मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि जब राज्यपाल के आदेश पर किसी अधिकारी का निलंबन हुआ है तो उसे अनअधिकृत कार्रवाई कैसे कहा जा सकता है। इस मत के साथ हाईकोर्ट ने क्लास वन ऑफिसर विकास उपायुक्त कृष्णकांत पांडे के निलंबन को सही ठहराया। जस्टिस संजय यादव और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पांडे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने निलंबन को चुनौती दी थी। पांडे का कहना था कि जिस अधिकारी ने उसे निलंबित किया है उसके लिए वह अधिकृत नहीं है।
केके पांडे वर्तमान में जपं नागौद, सतना में सीईओ के पद पर डेपुटेशन पर पदस्थ हैं। पांडे का मूल पद उपायुक्त विकास है। भ्रष्टाचार के आरोप में 28 जनवरी 2020 को निलंबित कर दिया था। पांडे ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष चुनौती दी। एकलपीठ ने 6 मार्च 2020 को मप्र सर्विस रूल्स 1966 के नियम 9 के उपनियम 1 के तहत पांडे के निलंबन को सही माना। फिर पांडे ने डबल बैंच के समक्ष अपील पेश की। पांडे की ओर से दलील की गई कि वह क्लास वन अधिकारी है और उसका निलंबन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव के आदेश पर हुआ जो कि अवैधानिक है। हाईकोर्ट ने अधिकारी का निलंबन आदेश का अवलोकन भी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलार्थी का निलंबन राज्यपाल के आदेश पर हुआ है, अपर सचिव ने उस आदेश को पारित किया है। ऐसी स्थिति में निलंबन आदेश की वैधानिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/the-high-court-upheld-the-suspension-of-deputy-commissioner-development-there-is-no-question-of-unauthorized-action-if-suspension-on-the-order-of-the-governor-127058927.html
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