कल यानि बैकुंठ चतुर्दशी को पृथ्वी की सत्ता का आदान-प्रदान होगा। श्री हर अर्थात राजाधिराज महाकाल पृथ्वी की सत्ता श्री हरि यानि भगवान विष्णु को सौपेंगे। इसी के साथ मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। सत्ता के इस हस्तातंरण को हरिहर मिलन कहा जाता है। इस दिन बाबा महाकाल राजसी ठाटबाट से पालकी में सवार होकर अपनी धाम महाकाल मंदिर से रात 11 बजे निकलेंगे और द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में भगवान विष्णु को पृथ्वी का कार्यभार सौंप देंगे। इसके बाद भगवान शिव कैलाश पर्वत पर तपस्या के लिए चले जाएंगे। पौराणिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहां विश्राम के लिए जाते हैं। इन चार महीनों में सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव के पास होता है। यही वजह है कि श्रावण और अगहन मास में महाकाल राजाधिराज होते हैं और प्रत्येक सोमवार को राजा के विभिन्न स्वरूपों में प्रजा का हाल जानने के लिए राजसी ठाटबाट के साथ निकलते हैं।
सादगी से निकलेगी राजाधिराज की सवारी
सत्ता के हस्तांतरण के लिए महाकाल मंदिर से भगवान शिव की सवारी रात 11 बजे निकलेगी। सवारी गुदरी चौहारा, पटनी बाजार होते हुए गोपाल मंदिर आएगी। कोरोना महामारी के कारण सवारी बड़ी सादगीपूर्ण तरीके से निकाली जाएगी। गोपाल मंदिर में बाबा महाकाल विधि विधान से भगवान विष्णु को बिल्व पत्र की माला और भगवान विष्णु तुलसी की माला भगवान शिव को भेंट करेंगे।
आतिशबाजी और हिंगोट पर पूरी तरह से प्रतिबंध
कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन ने हरिहर मिलन के दौरान किसी भी तरह के आतिशबाजी और हिंगोट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/lord-shiva-will-hand-over-the-power-of-earth-to-kailash-harihar-meeting-will-be-held-in-ujjain-127954561.html
No comments:
Post a Comment