शहरी क्षेत्र में 10 महीने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में तीन साल से आंगनबाड़ी केंद्र के भवन का किराया कार्यकर्ताओं को नहीं मिला है। इस हाल में मकान मालिक कमरा खाली करने का दबाब बना रहे हैं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उधार लेकर भवन किराया देने के लिए मजबूर हैं। यह स्थिति इसलिए निर्मित हो रही है क्योंकि 10 साल से पदस्थ शहरी परियोजना अधिकारी एवं 5-5 साल पदस्थ सुपरवाइजर आंगनबाड़ी केंद्रों पर व्याप्त समस्याओं को दूर न करते हुए मनमानी कर रहे हैं। यह पीड़ा जिले भर आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने गुरुवार को नेहरू पार्क पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करते हुए व्यक्त की।
वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एकता यूनियन की सचिव प्रसून राठौर ने बताया कि शासन स्तर पर शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी भवन का किरया 3000 रुपए निर्धारित है। लेकिन महिला बाल विकास विभाग द्वारा कार्यकर्ताओं को 1200 रुपए से लेकर 1800 रुपए तक किराया दिया जा रहा है। शेष पैसा कार्यकर्ता को स्वयं की जेब से भरने पड़ रहे हैं। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र के आंगनबाड़ी भवन का किराया 700 रुपए निर्धारित है, लेकिन कार्यकर्ताओं को केवल 200 से 300 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन भवन किराए यह पैसा भी शहरी क्षेत्र की कार्यकर्ताओं को 10 महीने से नहीं दिया गया, वहीं ग्रामीण क्षेत्र की कार्यकर्ताओं को तीन साल से भवन किराया नहीं मिला है।
नेहरू पर पार्क में धरने पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेखा विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बदले हुए लंबा समय बीत गया है। बावजूद इसके विभाग के स्तर पर किराए की राशि पुराने भवन मालिक के खाते में जमा कराई जा रही है। जबकि वे भवन बदलने की जानकारी तीन बार बाबू व परियोजना अधिकारी को दे चुकी हैं। इसी तरह अन्य कार्यकर्ताओं ने भी बताया कि भवन बदलने के बाद भी पूराने मकान मालिक के खाते में किराए की राशि जमा कराई जा रही है।
यह मांगे भी हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की
- दस साल पदस्थ शहरी परियोजना अधिकारी व पांच से पदस्थ सुपरवाईजरों को तत्काल बदला जाए।
- केंद्र का भवन किराया समान रूप से समय पर दिया जाए।
- आंगनबाडी कर्मियों को श्रम कानून के दायरे में लाया जाए।
- 45वें, 46वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए।
- 21000 रुपए तक न्यूनतम वेतनमान हो।
- 10 हजार रुपए तक पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान की जाए।
इन उदाहरणों से जानिए किस तरह की जा रही किराए देने में मनमानी
1. सेक्टर-6 में आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 106 की कार्यकर्ता गीता भदौरिया ने बताया कि केंद्र के भवन के लिए 1200 रुपए महीना किराया स्वीकृत है, लेेकिन इसके एवज में उसे 750 रुपए किराया जा रह है। शेष पैसा कार्यकर्ता को स्वयं की जेब से भरना पड़ रहा है।
2.सेक्टर-1 केंद्र क्रमांक-4 में पदस्थ कार्यकर्ता सुचित्रा श्रीवास्तव ने बताया कि उसके केंद्र का भवन किरया भी 1200 रुपए स्वीकृत है, लेकिन उसे 750 रुपए ही किराए के लिए दिए जा रहे हैं।
3.सेक्टर-3 केंद्र क्रमांक 40 की कार्यकर्ता रेखा विश्वकर्मा ने बताया कि वह पांच साल से बड़े हॉल में केंद्र संचालित कर रहीं हैं। जिसका वास्तविक किराया 2500 रुपए है। लेकिन विभाग के स्तर पर उसे किराए के लिए केवल 1000 रुपए ही दिए जा रहे हैं। शेष 1500 रुपए जेब से भरने पड़ रहे हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/10-months-in-the-city-rent-of-anganwadi-buildings-not-found-in-the-village-for-three-years-landlord-says-vacate-room-127951946.html
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