कोरोना काल में हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद इस उपचुनाव में राजनीतिक दल जनसभाओं के झंझट से बचने के लिए बैठकों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। वजह यह है कि इस बार हाईकोर्ट ने चुनावी सभाओं को लेकर तमाम मापदंड तय कर दिए हैं। जबकि बैठकों को लेकर इनमें शिथिलता बरती गई है। ऐसे में पार्टियां इन्हीं बैठकों में जातिगत समीकरणों के हिसाब से नेताओं को बुलाकर अपना प्रचार कर रही हैं।
यहां बता दें कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने उपचुनाव के दौरान कोरोना वायरस का संक्रमण न फैले इसके लिए ग्वालियर चंबल संभाग के कलेक्टर, एसपी को कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद भी चुनावी कार्यक्रमों में भीड़ नहीं रुकी तो हाईकोर्ट ने नया आदेश जारी किया, जिसके बाद अब चुनावी सभाओं के लिए निर्वाचन आयोग ने अनुमति देना प्रारंभ कर दिया। लेकिन इसमें तमाम तरह के मापदंड होने के चलते राजनैतिक दल सभाओं के बजाए बैठकों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। यही कारण है कि 26 दिनों में भाजपा और कांग्रेस की तीन-तीन सभाएं हुई हैं। जबकि दोनों ही पार्टियों की बैठकें हर रोज किसी न किसी क्षेत्र में हो रही है, जिनमें जातिगत और क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले नेता शामिल हो रहे हैं।
^चुनावी कार्यक्रमों के लिए अनुमति जारी करने से पहले ही पार्टी को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा जाता है। साथ ही उनकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई जाती है। उसमें यदि इस तरह के उल्लंघन की स्थिति सामने आती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।- डॉ वीरेंद्र सिंह रावत, जिला निर्वाचन अधिकारी, भिंड
3 उदाहरण... अनुमति के झंझट से बचने सभा की जगह किया रोड शो या बैठकें
1 21 अक्टूबर को भाजपा से राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की रौन और बिरखड़ी में चुनावी सभाएं होना थी। लेकिन जब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी चुनावी सभा की अनुमति निरस्त हुई तो भाजपा ने रिटर्निंग ऑफिसर से उनके रोड-शो की अनुमति ले ली और सिंधिया ने रौन में रोड-शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई गईं।
2 22 और 23 अक्टूबर को यादव समाज के मतदाताओं को साधने कांग्रेस के स्टार प्रचार अरुण यादव पार्टी प्रत्याशी हेमंत कटारे, मेवाराम जाटव के समर्थन में सभाएं करने मेहगांव व गोहद आए थे। लेकिन कोविड-19 की गाइड लाइन के चलते पार्टी पदाधिकारियों ने चुनावी सभा की अनुमति न लेते हुए बैठकों की अनुमति ली और इन्हीं बैठकों में पार्टी का संदेश देकर चले गए।
3 वैश्य वर्ग को साधने के लिए भाजपा ने 17 अक्टूबर को पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता को मेहगांव भेजा। लेकिन कोविड-19 के प्रोटोकोल के चलते पार्टी ने उनकी सभा के बजाय बैठकें कराई। उन्होंने गोरमी में व्यापारी वर्ग के बीच बैठक की। इससे एक दिन पहले ओमप्रकाश सखलेचा ने भी मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में कई बैठकें ली थी।
मंच पर नहीं दिख रही सोशल डिस्टेंसिंग
चुनावी सभाओं में कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन कराने के लिए भले ही प्रशासन पार्टियों से शपथपत्र ले रहा हो। लेकिन सभाओं में गाइड लाइन का पालन होना नजर नहीं आ रहा है। हालांकि औपचारिकता बतौर भीड़ में बैठे कुछ चेहरों पर मास्क तो नजर आता है। लेकिन फोटो के चक्कर में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां मंच पर उड़ती हुई साफ दिखाई देती है। वहीं प्रशासन पार्टी से लिए गए शपथ पत्र तक अपनी पूरी जिम्मेदारी मानकर बैठता है।
नियम नहीं मानने पर होगी कार्रवाई
^चुनावी कार्यक्रमों के लिए अनुमति जारी करने से पहले ही पार्टी को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा जाता है। साथ ही उनकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई जाती है। उसमें यदि इस तरह के उल्लंघन की स्थिति सामने आती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।- डॉ वीरेंद्र सिंह रावत, जिला निर्वाचन अधिकारी, भिंड
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/bhind/news/meetings-calling-for-political-societies-to-be-held-instead-of-meetings-to-avoid-restrictions-127849002.html
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