Thursday, October 8, 2020

इम्युनिटी पावर बढ़ाता है जंगली मशरूम, आदिवासी घर में रखते हैं...बारिश के दौरान बांस के पेड़ों पर उगता है जंगली मशरूम

केसला ब्लाॅक के जंगलाें में कटे हुए बांस के पेड़ाें में उगने वाला जंगली मशरूम इम्युनिटी पावर बढ़ाने में मदद करता है। आदिवासी इसे बारिश के बाद घराें में संग्रह करके रखते हैं। आदिवासी इसे वर्षों से सेवन करते आ रहे हैं। कवक में क्लोरोफिल का अभाव होता है इसी कारण यह सफेद रंग के होते हैं। छतरी के आकार का हाेने के कारण आदिवासी इसे छतरी की भाजी कह कर बनाते हैं। केसला में गोंड और कोरकू आदिवासिओ कि संख्या 109 गावों में करीब 90 हजार 865 है। 99 प्रतिशत आदिवासी जंगली मशरूम को जले हुए बांस के पेड़ाें से एकत्र कर सुरक्षित रखते हैं और इसकी सब्जी बनाकर खाते हैं।

20 वर्षों से इथनोमेडीसीन पर शोध कार्य कर रहे सुखतवा प्राचार्य डाॅ.अभ्यंकर ने बताया कि यह आदिवासी वर्षाें से वनग्रामों में निवासरत हैं। यह लाेग प्रकृति से प्राप्त उत्पादों का उपभोग भी करते हैं व निरोगी और स्वस्थ्य रहते हैं। उन्हाेंने बताया कि जंगली मशरूम सहित अन्य प्राकृतिक उत्पाद इन्हें हदय रोग, कैंसर जैसी घातक बीमारियाें से बचने में मदद करते हैं।

ऐसा होता है जंगली मशरूम

मशरूम फफूंद या कवक है एक प्रकार के जीव हैं जो अपना भोजन मृत कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं। यह फंगस जीवों का एक विशाल समुदाय है जिसे साधारणतया वनस्पतियों में वर्गीकृत किया जाता है। वैसे तो कवक पौधों में कई बीमारियां उत्पन्न करते है जैसे गेहूं का रस्ट, गन्ने का रेड राट और मनुष्यों में रिंगवर्म, स्केबीज, दाद आदि सभी कवक करते हैं।

लेकिन कवक की एक किस्म मशरूम भी है जाे कि खाने योग्य होती है, आदिवासी इसे वर्षो से सेवन करते आ रहे हैं। कवक में क्लोरोफिल का अभाव होता है इसी कारण यह सफेद रंग के होते हैं। छतरी के आकार का हाेने के कारण आदिवासी इसे छतरी की भाजी कह कर बनाते हैं। जंगली मशरूम का वानस्पतिक नाम ष्प्लेउरोटस, ओसटीआटसष्कुल, प्लेउरोटेसी जगत कवक या फंजाई है।सामान्यतः इसे कुकरमुत्ता भी कहते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर

जंगली मशरूम कैंसर,रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाना, वाइरस रोग, बैक्टीरियल रोग,मधुमेह, कोलेस्टोल कम करना,आंख के रोग, और अर्थराइटिस राेगाें से रक्षा करने में सहायक है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं।

आदिवासियाें की मान्यता

आदिवासी मान्यताओं के अनुसार उनके पूवर्ज मशरूम को सुखाकर इसका हार बनाकर गले में पहनते थे। इनके राजा युद्व जीतने के बात मशरूम की दावत देते थे। इस परंपरा के कारण आदिवासी अभी भी इसका सेवन करते आ रहे हैं।



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Wild Mushroom Increases Immunity Power, Tribals Keep at Home ... Wild Mushroom Grows on Bamboo Trees During Rain


source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/wild-mushroom-increases-immunity-power-tribals-keep-at-home-wild-mushroom-grows-on-bamboo-trees-during-rain-127794950.html

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