प्रॉपर्टी टैक्स के जीआईएस सर्वे के वेरिफिकेशन के लिए नगर निगम ने इंजीनियरिंग कॉलेज के जिन 17 छात्रों को सर्वे का काम दिया था, उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली से नाराज होकर काम छोड़ दिया है। निगम ने एक महीने से ज्यादा काम तो करा लिया, लेकिन मानदेय नहीं दिया। इन छात्रों ने 26 अगस्त से वेरिफिकेशन का काम शुरू किया था।
छात्रों ने बताया कि उन्होंने साकेत नगर वार्ड 54 में संपत्ति कर का वेरिफिकेशन शुरू किया। करीब 6 हजार मकानों के जीआईएस सर्वे को चैक करना था। हम 17 स्टूडेंट्स थे, जिनकी 8 टीमें बनाई गई थीं। शुरुआत में हमें एक फॉर्मेट दिया। एक हफ्ते में जब करीब 500 घरों का सर्वे पूरा हो गया तो फॉर्मेट बदल दिया। नतीजा- नए फॉर्मेट के हिसाब से जानकारी भरने के लिए हमें दोबारा सर्वे करना पड़ा। हमें 394 रुपए प्रति दिन के हिसाब से मानदेय और सर्टिफिकेट देने की बात कही गई थी।
हम चाहते थे कि पेट्रोल का खर्चा अलग से मिल जाए। 25 सितंबर को एक महीना पूरा हो गया। हमने मानदेय मांगा, तो थोड़े दिन रुकने को कहा गया। फिर नया एप आ गया। अब कहा जा रहा है कि इस एप के हिसाब से सर्वे करना होगा। 4 दिन से हम लोगों ने काम बंद कर दिया है। अब हमें मानदेय मिलेगा, हम तभी काम करेंगे। इधर, नगर निगम कमिश्नर वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि एक-दो दिन में मानदेय का भुगतान कर देंगे। वहीं वार्ड 54 को छोड़कर अन्य वार्डों में एप से वेरिफिकेशन कराएंगे, यह आसान भी है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/after-incomplete-gps-survey-now-students-also-stopped-work-engineering-students-did-not-get-honorarium-127775399.html
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