सुप्रीम कोर्ट ने गोरखपुर की एसडीएम मनीषा वास्कले को नोटिस जारी कर पूछा है कि सुको को गुमराह कर स्थगन लिए जाने पर क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए? एसडीएम ने सुको में पेश घोषणा-पत्र में जानकारी दी थी कि सुको में इस मामले में कोई याचिका या अपील पेश नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय बैंच ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को नियत की है।
यह मामला अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट से संबंधित है। जबलपुर गढ़ा निवासी केशर इकबाल की ओर से मप्र हाईकोर्ट में वर्ष 2009 में याचिका दायर कर कहा गया कि उनकी जमीन को अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत सरकार ने अपने नाम कर लिया है। वर्ष 2017 में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका मंजूर करते हुए जमीन के रिकॉर्ड पर याचिकाकर्ता का नाम दर्ज करने का आदेश दिया। राज्य सरकार की ओर से एकलपीठ के आदेश के खिलाफ डिवीजन बैंच में अपील की गई। वर्ष 2018 में डिवीजन बैंच ने पहले अपील और फिर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। सुको ने वापस लेने के आधार पर 18 दिसंबर 2018 को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। अधिवक्ता रवि प्रकाश और अनुज त्यागी ने सुको को बताया कि इसके बाद फिर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई, जिसमें एसडीएम मनीषा वास्कले ने घोषणा पत्र में गलत जानकारी दी कि इस मामले में पूर्व में सुको में काेई विशेष अनुमति याचिका या अपील पेश नहीं की गई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुको ने एसडीएम को नोटिस जारी कर पूछा है कि गुमराह करने के लिए क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/supreme-court-asked-sdm-why-not-take-action-on-taking-postponement-127751619.html
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