Sunday, September 20, 2020

अब इलाज कोरोना टेस्ट से ज्यादा लक्षणों के आधार पर फोकस, सीटी चेस्ट को प्राथमिकता

कोरोना के बढ़ते मामले, सरकारी अस्पतालों में इलाज में लापरवाही की चर्चाएँ और निजी में बेड न होने की खबरों ने लोगों को सेहत के प्रति सजग कर दिया है। कोरोना वायरस से फेफड़ों के इंफेक्शन में तेजी से इजाफा होने से लोग अब भयग्रस्त हो रहे हैं। थोड़ी भी परेशानी समझ आने पर लोग कोरोना टेस्ट से ज्यादा चेस्ट सीटी स्केन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शहर के डायग्नोस्टिक सेंटराें में स्वेच्छा से सीटी स्केन कराने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर अब डॉक्टर्स लक्षणों के आधार पर इलाज पर कोविड टेस्ट से ज्यादा फोकस कर रहे हैं। कुछ दिन पहले जहाँ साँस की तकलीफ, बुखार, खाँसी होने पर डॉक्टर पहले कोरोना जाँच कराने की बात करते थे, अब इलाज शुरू करने के साथ ही टेस्ट कराने कहा जा रहा है।

10 से अधिक स्कोर तो भर्ती होना ही बेहतर

चेस्ट सीटी की रिपोर्ट में सीवियरटी स्कोर और कोरेड इन दो की रिपोर्टिंग का खासा महत्व है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पुष्पराज भटेले के अनुसार सीवियरटी स्कोर लंग्स की हालत बताता है। इसमें अधिकतम 25 अंक होते हैं। स्कोर 9 तक होने पर यह माना जाना चाहिए कि इंफेक्शन गंभीर नहीं है, घर पर रहकर दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है। 10 से 15 तक यह अंक मिलना दर्शाता है कि संक्रमण गंभीर है जिसके इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। यह स्कोर 16 या इससे अधिक है तो मरीज हाई रिस्क पर है तत्काल ही अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। सीटी में कोरेड काे 1 से 6 श्रेणी में रखा गया है, यह मरीज को कोरोना होने की संभावना बताता है। 3 अंक तक मोटे तौर पर मरीज कोरोना से सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन इससे अधिक की श्रेणी में होना गंभीर है।

मरीजों को मिल रही राहत

कोरोना संक्रमण से फेफड़ों को होेने वाले नुकसान के प्रति जहाँ लोग गंभीर हुए हैं वहीं चिकित्सक भी लक्षणाें के आधार पर इलाज दे रहे हैं। इन मरीजाें को कोविड जाँच के लिए कहा जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुररिया का कहना है कि सीटी स्केन का चलन बढ़ा है, लेकिन लोगाें को यह समझना चाहिए कि जितनी बारीक जाँच होगी कुछ न कुछ गड़बड़ी मिलेगी ही। ऐसी स्थिति में लोग सीटी को ही पर्याप्त न मानें और समय पर इलाज कराएँ यह बेहतर है। तमाम बैठकों में सरकारी व निजी चिकित्सकों को यही कहा गया है कि लक्षणों के आधार पर मरीज का इलाज करें, कोविड रिपोर्ट आने का इंतजार न करें। इस पहल को भी जिले में मृत्यु दर कम करने में सहायक माना जा रहा है।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/now-focus-on-treating-symptoms-more-than-corona-test-priority-of-ct-chest-127738995.html

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