Saturday, August 1, 2020

पिता के नाम ने बचाया, नहीं तो ज्यादती के आरोप में चले जाते जेल, एक जैसे नाम और सरनेम की वजह से गफलत, आवेदन में फरियादी ने कहा-मैं तो कभी भोपाल आया ही नहीं

वंदना श्रोती, एक सा नाम और सरनेम होने के कारण कई बार व्यक्ति मुसीबत में पड़ जाता है। ऐसा ही एक मामला कोलार थाने में सामने आया है, जिसमें ज्यादती के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति के बैंक खाते की जानकारी मांगी। बैंक को पुलिस ने बताया कि संबंधित के खिलाफ एक महिला ने ज्यादती की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस पर मुंबई में कार्यरत हमनाम ने भोपाल कोर्ट में दिए अग्रिम जमानत के आवेदन में बताया कि वह न ताे कभी भोपाल आया है और न किसी महिला को जानता है। कोर्ट ने जब केस डायरी मंगाई तब खुलासा हुआ कि मुंबई में कार्यरत व्यक्ति वह नहीं है, जिस पर महिला ने आरोप लगाए हैं।

जज ने केस डायरी देखी तब सामने आई केस की सच्चाई

भाई वेलफेयर सोसाइटी के फाउंडर मेंबर जकी अहमद के मुताबिक 5 नवंबर 2019 को एक महिला ने कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई कि सुनील टिवडेवाल प्रलोभन देकर ज्यादती करता रहा। जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी का आईसीआईसीआई बैंक में अकाउंट है। पुलिस ने ब्रांच मैनेजर से सुनील के खाते की जानकारी मांगी। इसमें पुलिस ने उसके पिता के नाम का उल्लेख नहीं किया। इस आधार पर बैंक ने मुंबई के खातेदार को मामले की जानकारी देते हुए पुलिस द्वारा मांगे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। इस पर मुंबई निवासी सुनील ने भोपाल कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया। जब कोर्ट ने केस डायरी बुलाई तो खुलासा हुअा कि डायरी में आरोपी का नाम सुनील टिवडेवाल पिता ओमप्रकाश था। जबकि अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने वाला सुनील टिवडेवाल पिता सागर प्रसाद बुद्धराम है। इस पर कोर्ट ने पुलिस को वांछित अपराधी सुनील पिता ओमप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. महजबीन खान की अदालत में ऑनलाइन हुई।

पत्नी की तबीयत बिगड़ी- ज्यादती का मामला सुनकर तनाव में आ गया था परिवार
सुनील कुमार पिता सागर प्रसाद ने बताया कि जैसे ही बैंक से मामले की जानकारी मिली। वैसे ही पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया था। उन्होंने बताया कि पत्नी कैंसर पेशेंट हैं। यह जानकारी लगने के बाद उसकी तबियत अाैर खराब हो गई थी। ज्यादती के आरोप लगने और प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस सीधे गिरफ्तार करती है। इसलिए अग्रिम जमानत लगाई। हालांकि अच्छा हुआ एक बार में ही मेरी बेगुनाही सामने आ गई।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
फाइल फोटो।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/fathers-name-saved-otherwise-he-would-go-to-jail-on-charges-of-atrocity-because-of-similar-name-and-surname-because-127576019.html

No comments:

Post a Comment