अमित सालगट. इस वक्त कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकना सामूहिक जिम्मेदारी है। जिन परिवारों में निधन हो रहे, वे भी इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। कई परिवारों ने अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां सिर्फ इसलिए सहेज रखी हैं, क्योंकि देशभर में लॉकडाउन चल रहा है। परिजन का कहना है इस वक्त कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकना ही अपनों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अस्थि विसर्जन तो बाद में भी कर लेंगे।
20 मार्च को पिता का निधन हो गया, लॉकडाउन खुलते ही हरिद्वार जाएंगे
सिल्वर पैलेस कॉलोनी के मनीष देवनानी ने बताया 20 मार्च को पिता अर्जुनदास का निधन हो गया। अस्थियां संचित करके रखी हैं। स्थिति सामान्य होने के बाद ही हरिद्वार जाकर इनका विसर्जन किया जाएगा।
21 मार्च को मां का निधन, संक्रमण न फैले इसलिए किसी को नहीं बुलाया
त्रिवेणी कॉलोनी के सुभाष खुराना ने बताया मां कमलादेवी का 21 मार्च को निधन हो गया। लॉकडाउन है तो अस्थि विसर्जन नहीं किया। किसी को घर पर नहीं बुलाया गया। लॉकडाउन खत्म होते ही हरिद्वार जाएंगे।
23 मार्च को भाई का निधन, घर में ही 10वें और 11वें की रस्म पूरी करवाई
विनय नगर निवासी लालचंद छाबड़ा ने बताया बड़े भाई ब्रजलाल का निधन 23 मार्च को हो गया था। 2 अप्रैल को घर में 10वें व 11वें की रस्म की। स्थिति सामान्य होते ही अस्थि विसर्जन हरिद्वार में करेंगे।
विपदा की घड़ी में दिखाई सतर्कता, मामा का निधन हुआ तो कराई जांच
द्वारकाधीश कॉलोनी निवासी कालू सारड़ा ने बताया मामाजी संतोष बाहेती का 5 अप्रैल को निधन हो गया था। हमने प्रशासन को सूचना देकर डॉक्टरों की टीम से जांच करवाई। संक्रमण नहीं निकल
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/first-immersion-of-corona-lockdown-so-family-kept-bones-in-muktidham-127125575.html
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