Tuesday, April 7, 2020

10 दिन से बुला रहे- घर वालों की जांच कर लो, पर टीम नहीं पहुंची

सुनील सिंह बघेल.अब इसे लापरवाही कहें या संसाधनों का अभाव, लेकिन उनके पीछे छिपे खतरे कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रहे हैं। कुछ मामलों में मृतकाें के पूरे लक्षण कोरोना के थे, लेकिन न उनकी जांच हुई न उनके परिजनों की। जनाजा निकला तो उसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। वहीं खजराना के एक डॉक्टर ने रानीपुरा में जिन मरीजों का इलाज किया, उनमें से दो कोरोना पॉजिटिव निकले। पिछले सप्ताहभर से जिम्मेदारों से जांच की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। 28 मार्च को ट्रैवल हिस्ट्री वाले एक युवक नावेद की मौत हुई थी। इससे पहले वह ममेरे भाई के साथ एमवायएच और एमआर टीबी अस्पताल इलाज के लिए भटकता रहा। हालत बिगड़ी तो दो दिन भर्ती किया। आखिरकार नावेद की मौत हो गई।

स्पष्ट लक्षणों के बावजूद कोरोना की जांच के लिए सैंपल नहीं लिया। इसके सात दिन बाद नावेद के ममेरे भाई इरफान की भी मौत हो गई। उसकी श्रीनगर कांकड़ में केमिस्ट की दुकान है। कॉन्टैक्ट हिस्ट्री के बावजूद दोनों मरीजों के न सैंपल लिए और न उनसे जुड़े लोगों की तलाश कर क्वारेंटाइन किया। नावेद का मामला तो बहुत संदिग्ध था, लेकिन उसके जनाजे में किसी सुरक्षात्मक प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। ऐसी लापरवाही से कोरोना के कई साइलेंट करियर तैयार हो रहे हैं।


क्लीन चिट मिले तो मरीजों का इलाज करें हम
ऐसा ही मामला खजराना के डॉ. अब्दुल गनी अंसारी और उनके दो डॉक्टर बेटों का है। डॉ. अंसारी ने रानीपुरा में जिनका इलाज किया था, उनमें से दो लोग पॉजिटिव निकल चुके हैं। अंसारी 10 दिन से गुहार लगा रहे हैं कि घर वालों की जांच हो जाए, लेकिन नतीजा सिफर है। उनका कहना है कि वैसे तो घर में किसी में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। एक बार हमें आधिकारिक रूप से क्लीन चिट मिल जाए तो फील्ड में जाकर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं।

किट नहीं, अस्पताल कर्मचारियों ने किया विरोध

तस्वीर हुकमचंद पॉली क्लिनिक की है। यहां महिला कर्मचारियों को किट नहीं मिल रही है। जिन्हेें मिल रही वह भी आधी-अधूरी मिल रही है। मंगलवार को महिला कर्मचारियों ने विरोध कर दिया कि पूरी किट नहीं मिली तो काम नहीं करेंगी। उन्होंने अधूरी किट डस्टबिन में डाल दीं। फोटो | संदीप जैन



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तस्वीर हुकमचंद पॉली क्लिनिक की है। यहां महिला कर्मचारियों को किट नहीं मिल रही है।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/calling-for-10-days-check-the-housemates-but-the-team-did-not-reach-127125636.html

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