रतलाम.गुरुवार से नगर पालिका निगम में कलेक्टर का शासन चलेगा। बुधवार को भाजपा बहुमत वाली परिषद का कार्यकाल खत्म हो गया।
शाम को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने कलेक्टर रुचिका चौहान को प्रशासक नियुक्त कर दिया। यह स्थिति नवंबर-दिसंबर में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के आगे बढ़ने के कारण बनी है। नगरीय निकाय चुनाव होने के बाद नई परिषद के कार्यभार ग्रहण करने तक कलेक्टर ही निगम की मुखिया होंगीं। अभी तक जो काम महापौर, एमआईसी और परिषद मिलकर कर रही थी। वे सारे अब अकेले कलेक्टर करेंगी।
राज्य सरकार ने इसलिए नहीं बढ़ाया कार्यकाल
राज्य सरकार चाहती तो वर्तमान परिषद का कार्यकाल अधिकतम 6 माह तक के लिए बढ़ा सकती थी, लेकिन सभी बड़े शहरों में भाजपा बहुमत वाली परिषद होने के कारण उसने ऐसा नहीं करते हुए प्रशासक बैठा दिया।
इसलिए बनी यह स्थिति : फरवरी में शहरी सीमा वृद्धि, वार्ड परिसीमन, महापौर, अध्यक्ष व पार्षदों के आरक्षण का कार्यक्रम जारी किया था। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने से सरकार ने इसे स्थगित कर दिया। 14 अगस्त को नया कार्यक्रम आने के बाद वार्ड परिसीमन हुआ लेकिन अंतिम प्रकाशन के पहले इंदौर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। अब जाकर सरकार ने 30 जनवरी के पहले वार्ड, महापौर और अध्यक्ष का आरक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
सबसे पहले प्रशासक थे डिप्टी कलेक्टर बीएन सक्सेना
निगम की कमान प्रशासक के हाथ में जाने का यह दूसरा मौका है। पहली बार 1981 से 1995 तक प्रशासक ने ही निगम का कामकाज चलाया था। तब भी चुनाव नहीं होने के कारण ऐसा हुआ था। पहले प्रशासक डिप्टी कलेक्टर बीएन सक्सेना थे। 1995 में चुनाव के बाद जयंतीलाल जैन पहले महापौर बने।
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source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/now-the-collector-is-the-head-of-the-municipal-corporation-till-the-new-council-takes-over-126411301.html
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