Saturday, January 18, 2020

शहर के आसपास दादी-नानी के घर का अहसास

शहरी जीवनशैली ने बच्चों का बचपन छीन लिया है। छोटे फ्लैट के कारण बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी की गोद में खेलने के बजाय वर्चुअल वर्ल्ड में विचरण करते हैं। इससे उनका सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। ऐसे बच्चों को ग्रामीण पृष्ठभूमि से रूबरू कराने का बीड़ा उठाया है बी पॉजीटिव ग्रुप ने। वह बच्चों को आसपास के गांव की सैर कराएगा।

डीबी स्टार भोपाल

राजधानी के आसपास के युवाओं ने ग्रीष्मकालीन शिविर को अब नए स्वरूप में लगाने की तैयारी की है। ये युवा पांच से पंद्रह साल तक के बच्चों को दादी-नानी के घर का अहसास कराने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। यह ग्रुप बिना किसी आर्थिक मदद के केवल जन सहयोग से ऐसा करने की तैयारी कर रहा है। इसमें शिक्षक कंचन नागर, सरपंच विजय लोधी, युवा उद्यमी सोनल दीक्षित समेत दर्जन भर युवक शामिल हैं। ग्रुप के सदस्य कंचन नागर का कहना है कि उन्होंने ऐसे लगभग आधा दर्जन गांवों को चिन्हित किया है, जहां नहरें, नदियां, तालाब, कुंए या बावड़ी हैं। साथ ही आसपास जंगल भी हों। इसमें भोपाल का कटारा हिल्स, मंडीदीप के पास दाहोद गांव, खेल ग्राम विशनखेड़ी, कोलार की पहाड़ा वाली माता मंदिर और इछावर का कनेरिया गांव शामिल है। इन गांव में पहले से बने हुए मकानों में रहने लायक वातावरण बनाया जाएगा। बहुत कम राशि में उन्हें यह सुविधा दी जाएगी। जो भी आय होगी, वह ग्रामीणों में ही बांट दी जाएगी। इनमें बच्चों को ग्रामीण परिवेश का आवास, भोजन आदि मुहैया कराया जाएगा। इन गांव में एक से सात दिन तक का कैम्प लगाया जाएगा। छोटे बच्चे यानि पांच से दस साल के लिए केवल रविवार और दस से पंद्रह साल तक के बच्चों के लिए सात दिन का कैम्प लगाया जाएगा। इसमें बच्चों को शामिल करने के लिए स्कूलों में संपर्क किया जाएगा। ग्रुप के सदस्य सोनल दीक्षित बताते हैं कि इसका मकसद शहर में रहने वाले बच्चों को ग्रामीण परिवेश की समस्त जानकारी देना है। गांव में दादी-नानी के घर जाने जैसा अहसास हो, इसके लिए गांव की बुजुर्ग महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। ये दादी और नानी बच्चों को रात में कहानियां भी सुनाएंगी। इस दौरान बच्चों को कई मनोरंजक खेल खिलाए जाएंगे। यहां मोबाइल फोन का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

दादी-नानी का घर बनाएंगे

बच्चों को पता ही नहीं है कि पहले गांव कैसे होते थे। इसलिए हम एक प्रयास कर रहे हैं, जिससे बच्चे जान सकें कि पहले क्यों बच्चे दादी-नानी के यहां जाने के लिए उतावले रहते थे। भावी पीढ़ी को पुरानी यादें बांटने के लिए कुछ गांव चिन्हित किए हैं। यह काम फरवरी अंत तक पूरा हो जाएगा। - कंचन नागर, विजय लोधी, राम निवास पाल, सोनल दीक्षित, हीरेंद्र पाटीदार, सदस्य, बी पॉजीटिव ग्रुप

सांकेतिक चित्र

1 अप्रैल से 10 जून के बीच लगाएंगे कैम्प

कैम्प की शुरूआत 1 अप्रैल से होगी और यह 10 जून तक चलाए जाएंगे। अब तक छह गांव में बात हो चुकी है और एक दर्जन गांव को जोड़ने का लक्ष्य है। हर गांव के लिए एक प्रभारी बनाया जाएगा। गांव के ही युवाओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। जो भी राशि इससे एकत्रित होगी, वह सब ग्रामीणों के बीच बांट दी जाएगी। इस तरह खाने के मीनू में चूल्हे की रोटी, हांडी पर बनी दाल-चावल और अन्य चीजें परोसी जाएंगी। एक्टिविटी में वही खेल शामिल किए जाएंगे, जो गांव में खेले जाते थे। जैसे गिल्ली डंडा, रस्सी कूद, सितोलिया, पहिया घुमाना, तीन टांग, छुपम-छुपाई, पेड़ पर चढ़ने जैसे खेल शामिल होंगे। इस दौरान एक डॉक्टर वहां संपर्क में रहेगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद मिल सके।



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Bhopal News - mp news feeling of grandma and grandmother around town
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/mp-news-feeling-of-grandma-and-grandmother-around-town-065021-6428307.html

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