Friday, January 24, 2020

बोर्ड पैर्टन पर होने वाली पांचवीं-आठवीं की परीक्षा में प्रदेश में पहली बार धार से छात्राओं की संख्या ज्यादा


दो कारण: पहला ट्राइबल क्षेत्रों के 265 छात्रावास में दर्ज 15 हजार बच्चांे में 8 हजार छात्राएं, दूसरा जिला शिक्षा केंद्र के 23 छात्रावासों में 10 बालिका छात्रावास

माशिमं की बोर्ड परीक्षा में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से छात्राएं भी भविष्य गढ़ने की तैयारी में हैं। आदिवासी क्षेत्रों से अमूमन छात्राओं को एक समय के बाद पढ़ाई छोड़ना पढ़ती है। इस बार बोर्ड पैटर्न पर होने वाली 5वीं, 8वीं की परीक्षा में छात्राओं की संख्या 50% ज्यादा होगी। ये छात्राएं सरकारी स्कूल की हैं। शिक्षा विभाग का दावा है कि प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है जब जिले के आदिवासी क्षेत्रों से छात्राओं की संख्या ज्यादा होगी। इसका कारण छात्रावास खोलना और उनसे आदिवासी क्षेत्र की बालिकाओं को जोड़ना है।

जिले के डही, कुक्षी, बाग, निसरपुर, टांडा, सरदारपुर, गंधवानी, नालछा, मांडू, मनावर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि चारों आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के स्कूलों की पांचवीं में बच्चों की संख्या 7944 व आठवीं में 5934 दर्ज है। पांचवीं में 3972 व आठवीं में 2967 छात्राएं शामिल होंगी। इसका कारण अफसरों ने आदिवासी क्षेत्रों में बालिका छात्रावास खोलने व छात्राओं को जोड़ना बताया है। अफसराें का ये भी मानना है इससे ये भी पता चलेगा कि आगामी परिणामों में ऐसी कितनी छात्राएं पढ़ने में दक्ष हैं। शैक्षणिक गुणवत्ता का आंकलन भी लगाया जाएगा।

फार्मूला कारगर साबित
हुआ, इसलिए बढ़ी संख्या


बोर्ड पैटर्न पर होने वाली कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षा में आदिवासी छात्राओं की संख्या बढ़ना आश्चर्यजनक है। ऐसा देखने में आया है कि एक निश्चित समय के बाद किसी कारणवश छात्राओं को पढ़ाई छोड़ना पड़ती है। मगर विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में छात्रावास संचालन विशेषकर उन्हें सर्व सुविधा युक्त बनाने का हमारा यह फॉर्मूला कारगर साबित हुआ। छात्राओं की संख्या बढ़ने से इसका असर परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा। हमें ये पता चलेगा कि ऐसी कितनी आदिवासी बालिकाएं हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में खुद को बेहतर साबित कर सकती हैं।
कमलसिंह ठाकुर, डीपीसी, शिक्षा विभाग, धार

कक्षा पांचवी में बाग, आठवीं में डही में ज्यादा बालिकाएं

क्षेत्र पांचवीं आठवीं

ढही 915 1004

कुक्षी 778 711

बाग 1965 916

निसरपुर 458 425
(नोट-स्त्रोत शिक्षा विभाग के अनुसार)

छात्रावासों से जुड़ी है बालिकाएं, इसलिए बढ़ी संख्या

शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से बेटियों को स्कूल भेजने के लिए परिजन कतराते थे, क्योंकि परिजनाें को बेटी के ठहरने और खाने-पीने की चिंता थी। ऐसी स्थिति में विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में छात्रावास खोले। इसके बाद गांवों में रहने वाली आदिवासी बालिकाओं का छात्रावास से सीधे जुड़ाव हुआ। आंकड़ों के मुताबिक कुल 265 छात्रावासों में 23 छात्रावास जिला शिक्षा केंद्र के हैं। इनमें 200 सीटर 13 कस्तूरबा गांधी छात्रावास हैं। जिनमें छात्र-छात्राएं ज्यादा हैं। इसके साथ ही 10 बालिका छात्रावास अलग से खोले गए। जिनमें तीन 100 सीटर और सात 50 सीटर है। इसके अलावा कुल 265 छात्रावासों में दर्ज 15 हजार बच्चों में 8 हजार बालिकाएं हैं।

आदिवासी क्षेत्रों से भविष्य गढ़ने की तैयारी में छात्राएं...



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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-for-the-first-time-in-the-state-in-the-fifth-eighth-examination-to-be-held-on-board-pattern-the-number-of-female-students-is-more-than-dhar-071005-6473080.html

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