Saturday, January 11, 2020

रामकथा लोक व्यवहार की आचार संहिता है : आचार्य

भौंरा| किसके साथ कैसा व्यवहार हो, यह प्रभु श्रीराम के अलावा कोई नहीं जानता। गुरु से, माता-पिता से, भाई, मित्र यहां तक कि शत्रु से भी प्रभु का व्यवहार अनुकरणीय है। इसलिए कहा जाता है कि रामकथा लोक व्यवहार की आचार संहिता है। यह बातें कथा वाचक आचार्य राजन दीक्षित ने नगर के आजाद वार्ड में चल रही रामकथा के आठवें दिन कही। चित्रकूट में श्रीराम और भरत मिलन की कथा को विस्तार से सुनाते हुए आचार्य राजन दीक्षित ने कहा श्रीराम ने भरतजी से कहा कि भैया कैसा समय आ गया, त्रेता के भाई आपस में विपत्ति बांटा करते थे और कलयुग के भाई आपस में संपत्ति बांटते हैं। भरत प्रभु के खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौटते हैं और खड़ाऊ की आज्ञा से राज्य का संचालन करते हैं।



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source https://www.bhaskar.com/mp/betul/news/mp-news-ramkatha-is-a-code-of-conduct-for-public-behavior-acharya-065521-6374972.html

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