Monday, January 6, 2020

कोटा के सरकारी अस्पताल में हुई 110 बच्चों की मौत के बाद मप्र के अस्पतालों के हालात जाने तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई

धार | बच्चों की जान के लिहाज से धार जिले में सांसें बेसहारा हैं। 21 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले में 13 विकासखंड हैं, जिनमें से 12 में डॉक्टर नहीं हैं। पिछले 9 महीने में यहां 908 बच्चों की मौत हो चुकी है। इतने बड़े जिले में बच्चों के डॉक्टर नहीं, रैफर कर जिला अस्पताल में पहुंचाया भी जाए तो वो सुविधाएं नहीं कि क्रिटिकल कंडीशन में जान बचाई जा सके। यानी फिर यहां से हर केस इंदौर रैफर। जिंदगी की जंग लड़ रहे बच्चे यहां से वहां रैफर होते-होते दम तोड़ देते हैं। जिले में 80 प्रतिशत गर्भवती और शिशुओं की मौत खून की कमी से होती है। डॉक्टरों की मानें तो शरीर में आयरन की कमी से खून की कमी होती है।

झाबुआ : 2019 में 195 मौतें
झाबुआ | जिला अस्पताल के शिशु गहन चिकित्सा इकाई में साल 2019 में 195 बच्चों की मौत हुई। सबसे ज्यादा बच्चे जुलाई और अगस्त में मौत का शिकार हुए। डॉक्टरों का कहना है, बच्चों की मौत के सबसे बड़े दो कारण समय पूर्व डिलीवरी और संक्रमण हैं।

रतलाम : 40 दिन में 61 मौत
रतलाम | रतलाम जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बीते 40 दिन में 61 नवजात ने दम तोड़ दिया है। जिन नवजातों की मौत हुई है उनमें से सबसे ज्यादा 21 बच्चे श्वसन संकट सिंड्रोम के कारण मरे हैं। अधिकतर बच्चों को इंदौर रैफर करना पड़ता है।

बड़वानी : 5 साल में 1400 बच्चों की मौत

बड़वानी | महिला अस्पताल में पिछले पांच सालों में 1400 नवजातों की मौत हुई है और 1500 से ज्यादा ने पैदा होने से पहले ही दम तोड़ा। वजह जीवन बचाने के लिए महिला अस्पताल में पर्याप्त संसाधन नहीं है। यहां चार स्त्री रोग विशेषज्ञों के पद स्वीकृत है। इनमें से तीन खाली हैं। अब एक ही डॉक्टर है। वहीं एसएनसीयू में भी केवल 20 नवजातों को भर्ती करने की जगह है।

खंडवा : 7 में से छह विशेषज्ञों के पद रिक्त
खंडवा | जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में दो साल में ही 84 बच्चों की मौत हुई, क्याेंकि सीमित संसाधनों में अस्पताल के वार्ड में बच्चों का इलाज चल रहा है। 33 बेड के वार्ड में 2015 से स्वीकृत 7 में से 6 शिशुरोग विशेषज्ञाें के पद रिक्त हैं। हर साल स्वास्थ्य विभाग रिक्त पदों की सूची शासन को भेजता है, लेकिन हालात में सुधार नहीं हाे रहा है।

देवास : हर महीने 10 बच्चे तोड़ रहे दम

देवास | जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में हर महीने 9 से 10 बच्चे दम ताेड़ देते हैं। ज्यादातर बच्चे एेसे नवजात हाेते हैं, जिनका जन्म समय से पूर्व हाेता है या वजन बेहद कम हाेता है। एसएनसीयू वार्ड में हर माह 150 से 190 बच्चे भर्ती हाेते हैं। जिले में एकमात्र एसएनसीयू है। इसमें भी वेंटिलेटर एक ही है। जबकि अावश्यकता दाे की है। डाॅक्टर भी एक कम है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
धार में पिछले 9 महीने में 908 बच्चों की मौत हो चुकी है।


source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/after-the-death-of-110-children-in-a-government-hospital-in-kota-the-situation-in-the-hospitals-of-madhya-pradesh-was-shocking-126450679.html

No comments:

Post a Comment